
आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझ रहे युवक ने दी जान
मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 28 वर्षीय युवक जाहिद ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से कर्ज और गंभीर बीमारी से परेशान था। घटना के बाद से दोनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है और इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

पुलिस के अनुसार जाहिद दर्जी का काम करता था और पिलोखड़ी चौकी क्षेत्र के लखीपुरा मोहल्ले का रहने वाला था। उसकी शादी करीब पांच साल पहले लिसाड़ी गेट इलाके की 24 नंबर गली निवासी समरीन से हुई थी। दंपती के दो छोटे बच्चे हैं—एक बेटा और एक बेटी। फिलहाल बच्चों को उनके पिता की मौत की जानकारी नहीं दी गई है।
पिछले करीब एक महीने से जाहिद अपनी ससुराल में रह रहा था। परिजनों का कहना है कि बीमारी के कारण वह नियमित रूप से काम नहीं कर पा रहा था, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। इलाज का खर्च और उधार बढ़ने से वह मानसिक तनाव में रहने लगा था। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर कहासुनी भी हो जाती थी।
शुक्रवार सुबह जब जाहिद काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकला, तो पत्नी ने उसे आवाज दी। अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा अंदर से बंद होने पर परिजनों को शक हुआ और उन्होंने किसी तरह दरवाजा तोड़ा। कमरे के अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। जाहिद का शव चुन्नी के सहारे छत पर लगे पंखे के कुंडे से लटका हुआ था।
घटना की जानकारी मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। लिसाड़ी गेट थाना पुलिस और पिलोखड़ी चौकी की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
परिजनों ने बताया कि जाहिद इससे पहले भी मानसिक रूप से काफी परेशान रहता था। करीब चार महीने पहले उसने आत्महत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय परिवार के लोगों ने उसे समझा-बुझाकर संभाल लिया था। इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं हो सका और वह अंदर ही अंदर टूटता चला गया।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की पूरी तरह पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है और पुलिस सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
जाहिद की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कर्ज, बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए समय पर मदद और परामर्श कितना जरूरी है। एक मेहनतकश युवक की इस तरह मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, जिसका असर शायद लंबे समय तक बना रहेगा।



