
अंधेरे से उजाले तक का सफर: 78 साल बाद बाराबंकी के गड़रियन पुरवा में जली उम्मीद की पहली बत्ती
बाराबंकी जिले का गड़रियन पुरवा गांव अब इतिहास के एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुका है। आजादी के 78 साल बाद जब गांव में पहली बार बिजली पहुंची, तो यह सिर्फ एक तकनीकी सुविधा नहीं रही, बल्कि पीढ़ियों के इंतजार का अंत और भविष्य की नई शुरुआत बन गई। गांव में बल्ब जले तो लोगों की आंखें भी चमक उठीं।

लखनऊ से महज 38 किलोमीटर दूर बसे इस गांव तक बिजली का उजाला पहुंचने में सात दशक से अधिक का समय लग गया। खराब सड़कों और दुर्गम रास्तों के कारण यह दूरी तय करने में भले ही एक घंटे से ज्यादा लगता हो, लेकिन असली दूरी अंधेरे और विकास के बीच की थी, जो अब मिट चुकी है।
83 वर्षीय रामनरेश यादव बताते हैं कि उन्होंने बचपन में लखनऊ की रोशनी देखी थी। तभी मन में ख्याल आया था कि काश उनके गांव में भी बिजली हो। दशकों तक वह सपना अधूरा रहा, लेकिन 20 जनवरी को जब पहली बार उनके घर में बल्ब जला, तो वह पल उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी बन गया।
बिजली आने की खुशी में गांव के बाहर लगे ट्रांसफॉर्मरों पर महिलाओं ने टीका लगाया और पूजा की। बच्चों ने पहली बार टीवी पर कार्टून देखे, तो वे खुशी से उछल पड़े। गांव में ऐसा माहौल था जैसे कोई त्योहार मनाया जा रहा हो।
सौभाग्य योजना फेज-3 के तहत गांव में पोल लगाए गए, तार खींचे गए और विद्युत आपूर्ति शुरू की गई। शिवराज को पहला बिजली कनेक्शन मिला। उनके अनुसार गांव की आबादी करीब 570 है और यहां अधिकतर लोग खेती और पशुपालन से अपनी आजीविका चलाते हैं।
अब तक बिजली न होने से गांववासियों को सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बेटों की शादी में रिश्तेदार गांव आने से बचते थे। रात होते ही घुप अंधेरा छा जाता था। गर्मी और बरसात में हालात और भी मुश्किल हो जाते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। सांसद, विधायक और प्रशासन तक गुहार लगाई गई। बीच में वन विभाग की आपत्तियों के चलते काम कई बार रुका, लेकिन आखिरकार सभी बाधाएं दूर हुईं और गांव तक बिजली पहुंच सकी।
बिजली आने से पहले गांव के अधिकतर परिवार सोलर सिस्टम पर निर्भर थे। रोशनी तो मिल जाती थी, लेकिन आधुनिक घरेलू उपकरणों का उपयोग संभव नहीं था। अब टीवी, फ्रिज, कूलर और वॉशिंग मशीन जैसे साधन गांव की जिंदगी का हिस्सा बन सकेंगे।
रोहित पाल बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती थी। ढिबरी की रोशनी में पढ़ना कठिन था। अब बच्चों को बेहतर माहौल मिलेगा। वहीं विपिन कुमार कहते हैं कि अब गांव भी शहरों की तरह सुविधाओं का आनंद ले सकेगा।
फिलहाल गांव में कुछ ही कनेक्शन जारी हुए हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि शेष आवेदनों पर तेजी से काम किया जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही पूरा गांव रोशनी से जगमगा उठेगा।
गड़रियन पुरवा के लिए यह सिर्फ बिजली का आना नहीं, बल्कि अंधेरे से आजादी और विकास की राह पर पहला मजबूत कदम है।



