हरियाणा

SBI लॉकर कांड में बड़ा खुलासा, बैंक मैनेजर समेत चार गिरफ्तार

हरियाणा के Faridabad में भारतीय स्टेट बैंक की एक शाखा में लॉकर तोड़कर उसमें रखे कीमती सामान से जुड़ा मामला अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। करीब आठ महीने तक चली जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में बैंक के तत्कालीन मैनेजर सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले में कई दस्तावेजी सबूत सामने आए हैं, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

यह मामला फरीदाबाद के सेक्टर-15 स्थित State Bank of India की शाखा से जुड़ा है। पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें तत्कालीन बैंक मैनेजर प्रीति कटारिया, एके सिंह, भावना नरवाल और वेंडर नीरज शर्मा शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोपी वेंडर नीरज शर्मा ने पहले अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी।

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब सेक्टर-15ए निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट डीसी गर्ग ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि उनका वर्ष 2014 से सेक्टर-15 स्थित बैंक शाखा में एक लॉकर है। उसी बैंक में उनका खाता भी है, जिससे हर साल लॉकर की फीस स्वतः कटती रहती है।

शिकायत में डीसी गर्ग ने बताया कि उनके पास लॉकर की मूल चाबी भी मौजूद है और उन्होंने अपने लॉकर में काफी कीमती सामान रखा हुआ था। उनके अनुसार लॉकर के अंदर लगभग एक किलोग्राम सोने के आभूषण और करीब तीन किलोग्राम चांदी के गहने सुरक्षित रखे हुए थे। यह सामान परिवार की कीमती संपत्ति थी और कई सालों से वहीं रखा हुआ था।

डीसी गर्ग के अनुसार करीब आठ महीने पहले उन्होंने आखिरी बार अपना लॉकर खोला था और उसके बाद सब कुछ सामान्य था। लेकिन कुछ समय बाद जब उनकी पत्नी नीलम बैंक में लॉकर ऑपरेट करने के लिए पहुंचीं तो वहां उन्हें एक हैरान कर देने वाली बात पता चली।

नीलम जब बैंक पहुंचीं और उन्होंने अपना लॉकर खोलने की बात कही तो बैंक कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके नाम का कोई लॉकर वहां मौजूद नहीं है। यह सुनकर वह चौंक गईं। इसके बाद उन्होंने कर्मचारियों को लॉकर नंबर बताया, लेकिन कर्मचारियों ने जवाब दिया कि वह लॉकर अब किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज है।

यह सुनकर परिवार के लोग पूरी तरह हैरान रह गए। उन्हें समझ नहीं आया कि बिना उनकी जानकारी के लॉकर कैसे किसी और के नाम पर दर्ज हो सकता है। जब उन्होंने बैंक कर्मचारियों से इस बारे में विस्तार से जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

डीसी गर्ग ने बैंक अधिकारियों से यह भी पूछा कि अगर लॉकर को तोड़ा गया था या उसमें कोई बदलाव किया गया था तो इसके लिए बैंक ने कौन-सी प्रक्रिया अपनाई थी। सामान्य तौर पर बैंक नियमों के अनुसार लॉकर तोड़ने या बदलने के लिए ग्राहक को पहले सूचना दी जाती है और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। लेकिन इस मामले में उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

बार-बार पूछने के बावजूद जब उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला तो उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवा दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी।

जांच के दौरान पुलिस ने बैंक से जुड़े कई दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगाले। पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर लॉकर को किस परिस्थिति में बदला गया और उसमें दर्ज नाम कैसे बदल गया। इस दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिनसे बैंक के कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध दिखाई देने लगी।

जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ पुलिस ने कई कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ भी की। करीब आठ महीने तक चली जांच के बाद पुलिस ने आखिरकार इस मामले में चार लोगों को हिरासत में लिया और उनसे लंबी पूछताछ की।

पूछताछ के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में तत्कालीन बैंक मैनेजर प्रीति कटारिया के अलावा एके सिंह, भावना नरवाल और वेंडर नीरज शर्मा शामिल हैं।

मामले की जानकारी देते हुए Mukesh Malhotra ने बताया कि जांच के दौरान कई दस्तावेजी सबूत सामने आए हैं जो आरोपियों की भूमिका की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें बैंक की सुरक्षा प्रणाली और ग्राहकों के भरोसे से जुड़ा मुद्दा शामिल है। यदि बैंक लॉकर जैसी सुरक्षित व्यवस्था में भी इस तरह की गड़बड़ी होती है तो यह ग्राहकों के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि लॉकर से रखा गया कीमती सामान कहां गया और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। जांच के दौरान बैंक के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने बैंक ग्राहकों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। वहीं पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि पुलिस जांच के जरिए उन्हें न्याय मिलेगा और उनके लॉकर में रखा कीमती सामान भी वापस मिल सकेगा।

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