हरियाणा

एचपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए आयोजित सब्जेक्टिव नॉलेज परीक्षा परिणाम चिंता का विषय

एचपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए आयोजित सब्जेक्टिव नॉलेज परीक्षा परिणाम चिंता का विषय

एचपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए आयोजित सब्जेक्टिव नॉलेज परीक्षा परिणाम चिंता का विषय

कोसली, 04 दिसंबर। ओमप्रकाश
हरियाणा युवा कांग्रेस की पूर्व प्रदेश महासचिव दीपा डाबला कहाडी ने हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा कॉलेज कैडर असिस्टेंट प्रोफेसर (इंगलिश) भर्ती के लिए आयोजित की गई सब्जेक्टिव नॉलेज परीक्षा के घोषित परिणामों ने पूरे राज्य में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 2200 अभ्यर्थियों में से केवल 151 उम्मीदवार ही न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पाए, जिससे 613 स्वीकृत पदों में से लगभग 75 प्रतिशत पद खाली रहने की स्थिति बन गई है। यह तथ्य स्वयं इस परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मूल्यांकन प्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

मीडिया को जारी बयान में दीपा डाबला ने कहा कि विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि असफल घोषित किए गए अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या यूजीसी, नेट एवं जेआरएफ योग्य युवाओं, पीएचडी धारकों तथा गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों की है। इतनी बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित और योग्य अभ्यर्थियों का असफल होना प्रश्नपत्र की कठिनाई स्तर, मूल्यांकन मानदंड और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करता है। इसी के साथ अनारक्षित वर्ग में चयनित लगभग 130 उम्मीदवारों में से 100 से अधिक अन्य राज्यों से होना तथा एससी और ओबीसी वर्ग के लिए निर्धारित 300 से अधिक आरक्षित पदों के अनुपात में केवल 21 अभ्यर्थियों का चयन किया जाना आरक्षण नीति के अनुपालन पर भी गंभीर सवाल उठाता है। इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए डाबला ने कहा कि परिणामों से स्पष्ट है कि किसी न किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई है, जिसके कारण हरियाणा के युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। डाबला ने कहा कि यह मामला केवल एक परीक्षा का नहीं बल्कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ न्याय का विषय है और इसकी निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
उन्होंने सरकार और एचपीएससी से मांग की है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, उत्तर-पुस्तिकाओं की समीक्षा या पुनर्मूल्यांकन का अवसर अभ्यर्थियों को प्रदान किया जाए तथा आरक्षण रोस्टर के पालन की स्थिति पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक की जाए। एचपीएससी के इन परिणामों से लगता है कि सरकारी नौकरियों में हरियाणा के युवाओं के लिए दरवाजे बंद होते जा रहे हैं वहीं प्रदेश में आरक्षण को भी एक षड्यंत्र के तहत खत्म किया जा रहा है। डाबला ने कहा कि हरियाणा के मेहनती युवाओं को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या अनुचित मूल्यांकन का शिकार नहीं होने दिया जाएगा।

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