
Rail Budget Preview: AI से चलेगा ऑपरेशन, स्लीपर वंदे भारत का विस्तार; 2026-27 में रेलवे को मिल सकता है ₹2.80 लाख करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा फंड
भारतीय रेलवे वित्त वर्ष 2026-27 में बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। आगामी बजट में रेल मंत्रालय को 2.70 लाख करोड़ से 2.80 लाख करोड़ रुपये तक का रिकॉर्ड आवंटन मिलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार की रणनीति केवल नई योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वर्षों से यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी बनी वेटिंग लिस्ट को स्थायी समाधान देने पर केंद्रित होगी। रेल मंत्री के “52 हफ्तों में 52 सुधार” के एजेंडे को बजट प्रस्तावों में साफ देखा जा सकता है।

लंबी दूरी के यात्रियों के लिए स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों को रेलवे की नई पहचान के तौर पर पेश किया जा रहा है। योजना के अनुसार जून तक 8 नई स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें शुरू हो सकती हैं, जबकि पूरे साल में इनकी संख्या 12 तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही आम और मध्यम वर्ग के यात्रियों के लिए अमृत भारत ट्रेनों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया जाएगा।
रेलवे अमृत भारत ट्रेन के नए संस्करण 3.0 पर भी काम कर रहा है, जिसमें पूरी तरह एसी कोच शामिल होंगे। मार्च तक इस ट्रेन के पटरी पर उतरने की संभावना है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में रैक निर्माण को तेज कर दिया गया है, ताकि मांग के अनुरूप ट्रेनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
वेटिंग लिस्ट की समस्या से निपटने के लिए रेलवे अतिरिक्त कोच जोड़ने, ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ाने और नई पीढ़ी के इंजनों के इस्तेमाल पर जोर देगा। बजट में ट्रैक दोहरीकरण, नई रेल लाइनों के विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के सैकड़ों स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का काम तेज होगा।
तकनीकी मोर्चे पर रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी में है। AI की मदद से ट्रेन शेड्यूलिंग, ट्रैक मेंटेनेंस और सुरक्षा निगरानी को अधिक स्मार्ट बनाया जाएगा, जिससे देरी और तकनीकी खराबियों में कमी आएगी। इसके साथ ही ग्रीन स्टेशन, ऊर्जा दक्ष संचालन और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी नए प्रावधान किए जा सकते हैं।
रेलवे की कमाई बढ़ाने के लिए माल ढुलाई को बजट की प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को बंदरगाहों, औद्योगिक क्षेत्रों और लॉजिस्टिक्स हब से जोड़ने के लिए निवेश बढ़ाया जाएगा। इससे माल परिवहन की लागत घटेगी और सड़क से रेल की ओर कार्गो शिफ्ट होने से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा रेलवे स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों के लिए अपने प्लेटफॉर्म खोलने की योजना पर भी आगे बढ़ सकता है। इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड और तकनीकी साझेदारियों की घोषणा संभव है, जिससे यात्रियों को बेहतर डिजिटल सेवाएं और नई सुविधाएं मिल सकेंगी।
कुल मिलाकर, 2026-27 का बजट भारतीय रेलवे को पारंपरिक परिवहन व्यवस्था से निकालकर तकनीक-आधारित, यात्री-केंद्रित और भविष्य-तैयार सिस्टम में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
