
उचाना साहित्य सेवी संगठन के प्रोफेसर जगबीर दुहन प्रधान तथा मास्टर रामप्रसाद महासचिव चुने गए। साहित्य समाज में फैली बुराइयों को पृष्ठ पर उकेरता है
उचाना साहित्य सेवी संगठन के प्रोफेसर जगबीर दुहन प्रधान तथा मास्टर रामप्रसाद महासचिव चुने गए। साहित्य समाज में फैली बुराइयों को पृष्ठ पर उकेरता है
उचाना साहित्य सेवी संगठन के प्रोफेसर जगबीर दुहन प्रधान तथा मास्टर रामप्रसाद महासचिव चुने गए। साहित्य समाज में फैली बुराइयों को पृष्ठ पर उकेरता है: धर्मवीर सिंह सेवानि जबवृत्त बीईओ। उचाना ब्राह्मण धर्मशाला में उचाना साहित्य सेवी संगठन का पुनर्गठन किया गया। इसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधान साहित्यकार रामफल खटकड़ ने की। कार्यक्रम का आरंभ जगदीश पांचाल की खूबसूरत कविता से किया गया जिसमें प्रत्येक मानव को अपने होने का एहसास करवाने का संकल्प दोहराया गया। पूर्व महासचिव खंड शिक्षा अधिकारी श्री धर्मवीर आर्य ने अपने वक्तव्य में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है , समाज में फैली तमाम बुराइयां साहित्य ही पृष्ठ पर उकेरता है। बड़े-बड़े बदलाव का साहित्य साक्षी होता है। उचाना में साहित्य सेवी संगठन बहुत पुराना है। इसके बैनर तले अनेकों पुस्तकों का निर्माण हो चुका है। सर्व सम्मति से नई टीम का चयन किया गया। जिसमें प्रोफेसर जगबीर दुहन को प्रधान, मास्टर रामप्रसाद को महासचिव, प्रिंसिपल रणबीर को उप प्रधान, सुनील दत्त आर्य सह सचिव, मास्टर हरिकेश खजांची, श्री बलवंत रॉय सहायक, सुरेश चौहान को प्रैस सचिव, शीशपाल शास्त्री, ओमप्रकाश प्राचार्य, माखनलाल लेक्चर को कार्यकारिणी में शामिल किया गया। रामपाल खटकड़ को फाउंडर सदस्य तो सलाहकार मंडल में धर्मवीर सिंह आर्य, सुबेर सिंह, गजे सिंह गिल, जय सिंह कटारिया को शामिल किया गया। इस अवसर पर मनजीत, रणधीर लोहान, देवी पर्सन, देशराज इत्यादि महत्वपूर्ण लोग शामिल रहे।
