
26 जनवरी से पहले दिल्ली में सघन जांच: बिना किराएदार सत्यापन 500+ मकान मालिकों पर एफआईआर, पुलिस ने तेज किया निगरानी अभियान
गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली पुलिस ने राजधानी की आंतरिक सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में बिना पुलिस सत्यापन के किराएदार और घरेलू सहायक रखने वाले 500 से अधिक मकान मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि यह अभियान अभी जारी है और आगे और भी कार्रवाई संभव है।
दिल्ली के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके साथ ही घर-घर जाकर किराएदारों और घरेलू सहायकों की जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि सत्यापन में लापरवाही से असामाजिक तत्वों को शहर में पनपने का मौका मिल सकता है।
लापरवाही पर सीधी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बार-बार जागरूक करने के बावजूद कई मकान मालिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे मामलों में मकान मालिक न सिर्फ खुद कानून के घेरे में आते हैं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था को भी कमजोर करते हैं। इसी वजह से अब चेतावनी के बजाय सीधी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
सत्यापन की आसान प्रक्रिया
दिल्ली पुलिस ने बताया कि मकान मालिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से या नजदीकी थाने में जाकर किराएदारों और घरेलू सहायकों का सत्यापन करा सकते हैं। जानकारी मिलने के बाद पुलिस उनके स्थायी पते, पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करती है।
लाखों सत्यापन पूरे
बाहरी दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा के अनुसार, वर्ष 2025 में बाहरी जिले में 897 किराएदारों और 18,119 घरेलू सहायकों का सत्यापन किया गया। वहीं, पूरे दिल्ली में अब तक करीब 2.30 लाख सत्यापन किए जा चुके हैं। नियम तोड़ने वाले 482 मकान मालिकों पर केस दर्ज हुआ है।
जेल और जुर्माने का प्रावधान
बिना सत्यापन किराएदार रखने को सरकारी आदेश का उल्लंघन माना जाता है। जांच में दोषी पाए जाने पर मकान मालिक को छह माह तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
‘आंखें और कान’ बने नागरिक
गणतंत्र दिवस से पहले पुलिस ने ‘आंखें और कान’ नाम से विशेष जनभागीदारी अभियान भी शुरू किया है। इसके तहत आरडब्ल्यूए, मार्केट एसोसिएशन, होटल और ढाबा संचालक, सुरक्षा गार्ड, पार्किंग स्टाफ, रेहड़ी-पटरी वाले और अन्य समुदायों को सतर्क किया जा रहा है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें। साथ ही, सीसीटीवी कैमरे लगाने और किराएदार सत्यापन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया
जा रहा है।



