
India 16th Census: जनगणना का डिजिटल महायज्ञ, 25 साल में खर्च 17 गुना बढ़ा, 11,718 करोड़ में बनेगा देश का डेटा नक्शा
भारत की 16वीं जनगणना इतिहास में एक नए अध्याय की तरह दर्ज होने जा रही है। यह जनगणना न सिर्फ 15 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही है, बल्कि पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। बीते 25 वर्षों में जनगणना पर होने वाला खर्च करीब 17 गुना बढ़ चुका है। जहां वर्ष 2001 में यह आंकड़ा 678 करोड़ रुपये था, वहीं अब अनुमानित लागत 11,718 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है।
💸 क्यों महंगी हुई जनगणना?
सरकार के मुताबिक, बढ़ती आबादी, तकनीकी बदलाव और डेटा सुरक्षा जैसी जरूरतों के कारण खर्च में भारी इजाफा हुआ है। इस राशि का बड़ा हिस्सा फील्ड कर्मियों के मानदेय, डिजिटल डिवाइस, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और डेटा प्रोसेसिंग पर खर्च होगा। केंद्र सरकार इस साल के बजट में प्रमुख आवंटन करेगी, जबकि शेष राशि अगले वित्त वर्ष में दी जाएगी।
📲 पहली बार डिजिटल-फर्स्ट जनगणना
16वीं जनगणना की पहचान इसका डिजिटल-फर्स्ट मॉडल है। इस बार गणनाकार मोबाइल ऐप और टैबलेट से घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। साथ ही, नागरिकों को सेल्फ-इन्यूमरेशन यानी खुद जानकारी भरने का विकल्प भी मिलेगा। इससे प्रक्रिया तेज होगी और मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी।
🧑💻 निजी क्षेत्र की एंट्री
डिजिटल सिस्टम को सुचारु रखने के लिए सरकार ने पहली बार निजी तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। करीब डेढ़ साल के लिए इनकी सेवाएं ली जाएंगी।
तकनीकी विशेषज्ञों को 25,000 रुपये प्रति माह
अन्य सहायक स्टाफ को 18,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा
इनका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि नियुक्ति राज्य सरकारें करेंगी।
🧾 जाति आधारित डेटा भी होगा दर्ज
जनगणना 2027 में जाति आधारित गणना को भी शामिल किया गया है। यह पहली बार होगा जब जाति संबंधी जानकारी पूरी तरह डिजिटल रूप से एकत्र की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे सामाजिक न्याय योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा।
👥 30 लाख कर्मी, 1 करोड़ मानव-दिन का रोजगार
इस महा-अभियान में करीब 30 लाख फील्ड कर्मियों की तैनाती होगी। इनमें शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और तकनीकी स्टाफ शामिल रहेंगे। इससे लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिन का रोजगार सृजित होगा।
🏘️ घर-घर डिजिटल सर्वे
हर घर का लोकेशन, बुनियादी सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, भाषा, धर्म, रोजगार, प्रवासन और विकलांगता जैसी जानकारियां सुरक्षित ऐप के जरिए दर्ज की जाएंगी। डेटा सुरक्षा के लिए विशेष एन्क्रिप्शन और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे।
✍️ खुद भी भर सकेंगे फॉर्म
सरकार ने नागरिकों को यह सुविधा दी है कि वे चाहें तो मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल के जरिए खुद ही जनगणना फॉर्म भर सकें। जिनके पास इंटरनेट नहीं है, उनके लिए गणनाकार घर आकर डेटा दर्ज करेंगे।
➡️ कुल मिलाकर, 16वीं जनगणना न सिर्फ आंकड़ों का संग्रह होगी, बल्कि यह डिजिटल इंडिया की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा डेटा अभियान बनने जा रही है।
