
फतेहाबाद में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया रील पर विवाद, DSP की चेतावनी के बाद DGP तक पहुंचा मामला
फतेहाबाद में कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील और तस्वीरें पोस्ट करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आम नागरिकों के लिए जिस कृत्य को कानूनन अपराध माना जाता है, वही काम वर्दीधारी कर्मचारियों द्वारा किए जाने पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में पहले DSP जगदीश काजला ने संबंधित पुलिसकर्मियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया था, लेकिन अब शिकायतकर्ता ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए DGP को कड़ी कार्रवाई की मांग वाला पत्र भेजा है।
अधिवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता एवं अधिवक्ता सुशील धारनिया का आरोप है कि उन्होंने कुल नौ लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी, जिनमें सात पुलिसकर्मी शामिल हैं। इन पुलिसकर्मियों पर ड्यूटी के दौरान वर्दी और हथियारों के साथ रील व फोटो अपलोड करने का आरोप है। इनमें महिला पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल बताए गए हैं।
धारनिया का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया लिंक और पुख्ता सबूतों के साथ शिकायत दी, इसके बावजूद जांच को औपचारिक बनाकर आरोपियों को बचाया गया। उनका दावा है कि हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार कोई भी पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो या वीडियो पोस्ट नहीं कर सकता।
जांच से पहले हटाई गईं पोस्ट
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने FIR दर्ज करने के बजाय पहले जांच शुरू की, जिससे आरोपितों को अपनी पोस्ट हटाने का मौका मिल गया। इसके बाद मामला चेतावनी देकर निपटा दिया गया।
पुलिस की ओर से सफाई दी गई कि अधिकांश पोस्ट पुरानी थीं, कुछ प्रोफाइल फोटो मात्र थीं और जांच के दौरान उन्हें हटा दिया गया। DSP जगदीश काजला ने बताया कि किसी भी वीडियो या फोटो से अपराध या भय फैलाने का उद्देश्य सामने नहीं आया, फिर भी सभी कर्मचारियों को भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी गई है।
अब DGP से कार्रवाई की मांग
DSP स्तर पर चेतावनी से असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के लिए DGP को शिकायत भेज दी है। ऐसे में यह देखना होगा कि पुलिस विभाग इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है।

