
यूनिवर्सिटी में महिला कर्मचारी से अभद्रता, प्रोफेसर पर गंभीर आरोप
हरियाणा के सोनीपत जिले के राई स्थित एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से एक बेहद चिंताजनक और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने शैक्षणिक संस्थानों में महिला सुरक्षा और कार्यस्थल की गरिमा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर अपनी ही महिला सहकर्मी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित महिला ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से करते हुए न्याय की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला दिसंबर 2025 से शुरू हुआ, जब आरोपी प्रोफेसर ने महिला कर्मचारी से संपर्क करना शुरू किया। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपनी सीमाएं लांघनी शुरू कर दीं। आरोप है कि वह देर रात तक महिला को लगातार व्हाट्सएप पर मैसेज भेजता था, जिनमें अश्लील और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता था। महिला कर्मचारी ने इन संदेशों को नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन प्रोफेसर की हरकतें लगातार बढ़ती गईं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आरोपी ने महिला सहकर्मी से निजी बातचीत के दौरान ‘हग’ यानी गले लगाने की मांग कर डाली। इस तरह की मांग ने न केवल महिला को असहज कर दिया, बल्कि उसे मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया। पीड़िता का कहना है कि यह व्यवहार पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य था, खासकर एक ऐसे व्यक्ति से जो एक शिक्षक और जिम्मेदार पद पर कार्यरत है।
महिला कर्मचारी ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि जनवरी 2026 के दौरान भी आरोपी प्रोफेसर ने कई बार उससे संपर्क करने की कोशिश की। उसने स्पष्ट रूप से दूरी बनाने का प्रयास किया और बातचीत से बचने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद प्रोफेसर लगातार उसे संदेश भेजता रहा। इससे महिला मानसिक दबाव में आ गई और उसे अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता सताने लगी।
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पीड़िता ने केवल मौखिक आरोप नहीं लगाए हैं, बल्कि उसने अपने दावों के समर्थन में ठोस सबूत भी प्रस्तुत किए हैं। उसने विश्वविद्यालय के कुलपति को दी गई लिखित शिकायत के साथ व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी जमा कराए हैं, जिनमें आरोपी द्वारा भेजे गए आपत्तिजनक संदेश स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। ये सबूत मामले की गंभीरता को और भी बढ़ा देते हैं।
जैसे ही यह मामला विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में आया, तुरंत कार्रवाई करते हुए कुलपति ने एक जांच समिति का गठन कर दिया। प्रशासन का कहना है कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी। जांच समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी तथ्यों और सबूतों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करे और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें निलंबन, सेवा से बर्खास्तगी या अन्य कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि संस्थान में किसी भी प्रकार की अभद्रता या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह घटना एक बार फिर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है। खासकर शैक्षणिक संस्थानों में, जहां शिक्षक समाज के लिए आदर्श माने जाते हैं, इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इससे न केवल संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचता है, बल्कि वहां काम करने वाली महिलाओं के आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना पर भी असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को आगे आकर अपनी आवाज उठाने की जरूरत है, जैसा कि इस महिला कर्मचारी ने किया। साथ ही संस्थानों को भी अपने आंतरिक तंत्र को मजबूत करना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो सके। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बनाए गए नियमों और कानूनों का सख्ती से पालन करना भी बेहद जरूरी है।
इस मामले ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपने कार्यस्थलों को वास्तव में सुरक्षित बना पाए हैं या अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देना केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है।
फिलहाल, सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। पीड़िता को न्याय मिलना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना ही इस मामले का सबसे अहम पहलू है।

