
वर्क वीजा के नाम पर बड़ा घोटाला: अंबाला के युवकों से 1.51 करोड़ की ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह बेनकाब
हरियाणा के Ambala में सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने विदेश में नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। यूरोप में वर्क वीजा दिलाने के नाम पर एक संगठित गिरोह ने दो युवकों से 1.51 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह लंबे समय से इसी तरह के फर्जीवाड़े में लिप्त था और देशभर में लोगों को अपना शिकार बना रहा था।

बेहतर भविष्य का सपना बना जाल
पीड़ित युवक सौरव और मोहित तंवर को यूरोप के देश Latvia में नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया। आरोपियों ने उन्हें आकर्षक वेतन, बेहतर जीवनशैली और स्थायी रोजगार का लालच दिया।
विदेश में करियर बनाने की चाहत में दोनों युवक आरोपियों के संपर्क में आए और धीरे-धीरे उनके झांसे में फंसते चले गए। शुरुआत में प्रक्रिया सामान्य और भरोसेमंद लगी, जिससे उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।
एजेंसी के नाम पर रचा गया खेल
पीड़ितों ने बताया कि उनकी मुलाकात “द न्यू लीड्स एजेंसी” के माध्यम से मुख्य आरोपी सत्यजीत घोष से हुई थी। उसने खुद को “विशिट मैनेजमेंट सर्विसेज” का कंसल्टेंट बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह पूरी वीजा प्रक्रिया आसानी से पूरी करवा देगा।
आरोपियों ने प्रोफेशनल तरीके से बातचीत की, फाइलें तैयार कीं और कागजों को वैध दिखाकर पीड़ितों का विश्वास जीत लिया। इसी विश्वास का फायदा उठाकर उनसे लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठे गए।
करोड़ों की वसूली, फर्जी दस्तावेज
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ितों से वीजा प्रोसेसिंग, टिकट, इंश्योरेंस और अन्य खर्चों के नाम पर कुल 1.51 करोड़ रुपये वसूले। लेकिन जब वीजा आवेदन किए गए, तो वे फर्जी दस्तावेजों के कारण खारिज हो गए।
इसके बावजूद आरोपियों ने पीड़ितों को गुमराह करते हुए कहा कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही वीजा मिल जाएगा। इस तरह वे लगातार उनसे पैसे लेते रहे।
विदेश में भी जारी रही ठगी
इस गिरोह की चालाकी यहीं तक सीमित नहीं रही। जांच में पता चला कि कुछ लोगों को विदेश भेजने के बाद भी उनसे पैसे वसूले गए। वहां उनसे “कन्वर्जन फीस” के नाम पर यूरो में रकम ली गई।
इससे यह साफ होता है कि गिरोह का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ था और वे विदेश में भी लोगों को ठगने का काम कर रहे थे।
पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
इस मामले की जांच Economic Offences Wing (आर्थिक अपराध शाखा) ने की, जिसके बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच के आधार पर Sector 9 Police Station Ambala में एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस ने मुख्य आरोपी सत्यजीत घोष के अलावा उसकी पत्नी शिल्पा कुंडू, भाई इंद्रजीत घोष, देबज्योति आचार्य और बृजेश बालकृष्णन नायर को नामजद किया है।
किन धाराओं में मामला दर्ज
आरोपियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है, जिसके तार पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से जुड़े हैं।
फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
युवाओं की बढ़ती महत्वाकांक्षा बनी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में नौकरी पाने की बढ़ती चाहत ऐसे मामलों को बढ़ावा दे रही है। बेहतर सैलरी और जीवन स्तर के लालच में कई युवा बिना पूरी जांच-पड़ताल किए एजेंटों पर भरोसा कर लेते हैं।
ठग इसी मानसिकता का फायदा उठाकर लोगों को फंसाते हैं और उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं।
कैसे पहचानें फर्जी एजेंट?
इस तरह की ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि किसी भी एजेंसी पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच की जाए। केवल अधिकृत और सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंसियों के जरिए ही वीजा प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
यदि कोई एजेंट बहुत जल्दी वीजा दिलाने या अत्यधिक आकर्षक ऑफर देने का दावा करता है, तो उससे सतर्क रहना चाहिए।
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला केवल दो युवकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। ऐसे गिरोह लगातार सक्रिय हैं और नई-नई तरकीबों से लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं।
जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और किसी भी तरह के लालच में आने से बचें।
आगे की जांच और उम्मीद
पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को निशाना बनाया है।
निष्कर्ष
Ambala का यह मामला दिखाता है कि विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर कैसे संगठित गिरोह लोगों को ठग रहे हैं। यह जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और किसी भी एजेंट पर भरोसा करने से पहले पूरी जानकारी जुटाएं।
क्योंकि थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है और आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रख सकती है।

