हरियाणा

बिजली लाइन पर काम के दौरान हादसा: कर्मचारी करंट से झुलसा, सुपरवाइजर पर लापरवाही का आरोप

हरियाणा के सेक्टर-52 पावर हाउस क्षेत्र से एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां बिजली लाइन पर काम करते समय एक कर्मचारी करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गया। इस हादसे ने एक बार फिर बिजली विभाग में सुरक्षा मानकों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घायल कर्मचारी ने इस पूरे मामले के लिए अपने सुपरवाइजर को जिम्मेदार ठहराया है, जिस पर अब पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, घायल कर्मचारी की पहचान तेजपाल के रूप में हुई है, जो रेवाड़ी जिले के दखोरा गांव का निवासी है। वह एक निजी कंपनी ‘इम्पीरियल’ में कार्यरत है, जो दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के लिए सेवाएं देती है। 19 अप्रैल की शाम करीब पांच बजे तेजपाल अपनी ड्यूटी पर तैनात था, तभी नाई की ढाणी फीडर में तकनीकी खराबी आ गई।

तेजपाल को इस खराबी को ठीक करने के लिए मौके पर भेजा गया। पीड़ित के अनुसार, उसके सुपरवाइजर गोविंद ने फोन के माध्यम से उसे सर्किट काटने का निर्देश दिया। खास बात यह रही कि सुपरवाइजर खुद मौके पर मौजूद नहीं था और दूर से ही निर्देश दे रहा था। तेजपाल का आरोप है कि उसने कई बार यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि बिजली लाइन पूरी तरह बंद है या नहीं, लेकिन उसे बार-बार यही कहा गया कि लाइन बंद कर दी गई है और वह काम शुरू कर सकता है।

पीड़ित ने यह भी बताया कि सुपरवाइजर ने उस पर काम जल्दी खत्म करने का दबाव बनाया। उसने दावा किया कि कुछ ही मिनटों के भीतर सुपरवाइजर ने उसे कई बार फोन कर जल्द से जल्द काम पूरा करने को कहा। इस जल्दबाजी के कारण तेजपाल पर मानसिक दबाव बन गया और उसने बिना पूरी पुष्टि के काम शुरू कर दिया।

जैसे ही उसने सर्किट काटने की प्रक्रिया शुरू की, अचानक जोरदार धमाका हुआ और वह करंट की चपेट में आ गया। इस हादसे में उसके हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तुरंत उसे बचाया और इलाज के लिए पास के एक निजी अस्पताल में पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सेक्टर-9ए स्थित ईएसआई अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

तेजपाल ने आरोप लगाया कि सुपरवाइजर की लापरवाही के कारण उसकी जान खतरे में पड़ गई। उसने यह भी कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कंपनी में इसी तरह के तीन हादसे हो चुके हैं। बावजूद इसके, कंपनी और संबंधित अधिकारी सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर नहीं हैं।

इस मामले में सेक्टर-53 थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुपरवाइजर गोविंद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है।

जांच अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि लाइन को पूरी तरह बंद किए बिना ही सर्किट काटने का निर्देश दिया गया था। यह न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है। बिजली से जुड़े कामों में इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बिजली विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अभी भी कई खामियां हैं। अक्सर काम को जल्दी खत्म करने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है, जिससे कर्मचारियों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यों में ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ का सख्ती से पालन होना चाहिए। किसी भी कर्मचारी को तब तक काम शुरू नहीं करना चाहिए, जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित न हो जाए कि बिजली सप्लाई बंद है। साथ ही, सुपरवाइजर की जिम्मेदारी होती है कि वह मौके पर मौजूद रहकर काम की निगरानी करे और कर्मचारियों को सही दिशा-निर्देश दे।

घटना के बाद स्थानीय लोगों और अन्य कर्मचारियों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे हादसे फिर हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और संबंधित दस्तावेजों व साक्ष्यों को इकट्ठा किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न केवल एक व्यक्ति के लिए गंभीर हादसा है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी भी है कि सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on X-twitter Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Back to top button