
पटाखों जैसी आवाज निकालने वाली बाइकों पर शिकंजा, गाजियाबाद में सख्त नियम लागू
गाजियाबाद में सड़कों पर तेज धमाकेदार आवाज करने वाली बुलेट मोटरसाइकिलों के खिलाफ अब प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। लंबे समय से लोगों की शिकायतों और बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जो भी बाइक चालक अपनी गाड़ी में मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर पटाखों जैसी आवाज निकालते हुए पकड़ा जाएगा, उसकी गाड़ी की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) रद्द कर दी जाएगी और उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

शहर में पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जहां युवा अपनी बाइकों को आकर्षक बनाने और अलग दिखने के लिए उनमें बदलाव करवा रहे हैं। खासतौर पर बुलेट मोटरसाइकिल में साइलेंसर बदलकर ऐसी आवाज निकाली जाती है, जो पटाखों या बम जैसी प्रतीत होती है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों के लिए परेशानी का कारण भी बनता जा रहा है।
इन सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिवहन आयुक्त के निर्देश पर गाजियाबाद में एआरटीओ प्रशासन अशोक श्रीवास्तव ने एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक में बुलेट मोटरसाइकिल के अधिकृत डीलर, गैराज संचालक और वर्कशॉप मालिक शामिल हुए। बैठक में अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी स्थिति में अवैध साइलेंसर की बिक्री या उसकी फिटिंग नहीं की जानी चाहिए।
अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि कोई डीलर या गैराज संचालक इस नियम का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें एक लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
परिवहन विभाग का मानना है कि इस समस्या की जड़ सिर्फ वाहन चालक ही नहीं हैं, बल्कि वे लोग भी हैं जो इस तरह के साइलेंसर बेचते या लगाते हैं। इसलिए अब कार्रवाई का दायरा बढ़ाकर डीलर और मैकेनिक तक भी कर दिया गया है, ताकि इस अवैध गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
इसके अलावा, सड़कों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई है। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमें अलग-अलग इलाकों में जाकर ऐसे वाहनों की जांच करेंगी। अगर किसी बाइक में नियमों के खिलाफ साइलेंसर लगा हुआ पाया गया, तो मौके पर ही चालान किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर वाहन को जब्त भी किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मॉडिफाइड साइलेंसर न केवल ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं, बल्कि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होते हैं। तेज आवाज से लोगों में मानसिक तनाव बढ़ता है, नींद प्रभावित होती है और हृदय रोगियों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा, अचानक तेज आवाज से सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालक भी घबरा सकते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि खासतौर पर रात के समय तेज आवाज करने वाली बाइकों से काफी परेशानी होती थी। कई बार छोटे बच्चे डरकर रोने लगते थे और बुजुर्गों को भी असहज महसूस होता था। ऐसे में यह कदम शहर में शांति बनाए रखने में मदद करेगा।
हालांकि, कुछ बाइक प्रेमियों का कहना है कि वे अपनी बाइकों को अलग लुक देने के लिए यह सब करते हैं, लेकिन अब उन्हें भी नियमों का पालन करना होगा। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यक्तिगत शौक के नाम पर कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
परिवहन विभाग ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। यदि कहीं भी ऐसी बाइक दिखाई देती है, जो पटाखों जैसी आवाज कर रही है, तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा सकती है। इससे विभाग को कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
यह पहल केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों में जागरूकता फैलाना भी है। विभाग चाहता है कि लोग खुद समझें कि इस तरह के बदलाव न केवल अवैध हैं, बल्कि समाज के लिए भी नुकसानदायक हैं।
कुल मिलाकर, गाजियाबाद में शुरू किया गया यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ता है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन की इस सख्ती का कितना असर पड़ता है और लोग कितनी जिम्मेदारी के साथ नियमों का पालन करते हैं।



