
बाइक चोरों के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा: हरियाणा-राजस्थान में सक्रिय गिरोह बेनकाब, 16 बाइक बरामद
हरियाणा में सक्रिय अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। हरियाणा के सिरसा जिले के डबवाली क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई में दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके कब्जे से चोरी की गई 16 मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। यह सफलता पुलिस की सतर्कता और लगातार चलाए जा रहे विशेष अभियान का परिणाम मानी जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजदीप सिंह उर्फ बब्बू निवासी गांव साबुआना और परमजीत सिंह निवासी गांव खाराखेड़ी, जिला हनुमानगढ़ के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी लंबे समय से हरियाणा और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे और फिर चोरी की गई मोटरसाइकिलों को अन्य स्थानों पर बेच देते थे।
इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। 9 सितंबर 2025 को डबवाली शहर थाना में पवन जैन नामक व्यक्ति ने अपनी बाइक चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह संगरिया का निवासी है और चौटाला रोड स्थित एक बैंक में कार्यरत है। उसने बताया कि वह अपनी मोटरसाइकिल बैंक के बाहर खड़ी कर अंदर गया था, लेकिन वापस लौटने पर उसकी बाइक वहां नहीं मिली।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया, जिसमें शहर थाना डबवाली, स्पेशल स्टाफ और एंटी व्हीकल थेफ्ट टीम के अधिकारी शामिल थे।
जांच के दौरान पुलिस ने कई तकनीकी साधनों का सहारा लिया। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और मुखबिरों की मदद ली गई। इन सभी प्रयासों के बाद पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले, जिनके आधार पर कार्रवाई करते हुए मंगलवार को गांव अलीकां, जिला सिरसा में छापेमारी की गई।
इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे हरियाणा और राजस्थान के विभिन्न इलाकों से मोटरसाइकिलें चोरी करते थे। उन्होंने यह भी बताया कि चोरी के बाद वे इन बाइकों को सस्ते दामों पर बेच देते थे या फिर उनके पार्ट्स निकालकर अलग-अलग बेचते थे।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 16 चोरी की गई मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। ये बाइकें अलग-अलग स्थानों से चुराई गई थीं और अब पुलिस इनके असली मालिकों की पहचान करने में जुटी है। बरामद वाहनों की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।
इस मामले में योगेश कटारिया ने बताया कि मुख्य आरोपी राजदीप सिंह के खिलाफ पहले से ही डबवाली और राजस्थान के विभिन्न थानों में चोरी के 12 मामले दर्ज हैं। इससे यह साफ होता है कि वह एक आदतन अपराधी है और लंबे समय से इस तरह की वारदातों में शामिल रहा है।
पुलिस अब आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। रिमांड के दौरान उनसे और पूछताछ की जाएगी, जिससे इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सके। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ से और भी कई मामलों का खुलासा हो सकता है।
यह मामला इस बात का भी संकेत देता है कि वाहन चोरी अब एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी है, जिसमें कई लोग शामिल होते हैं और अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क फैला होता है। ऐसे में पुलिस के लिए इन गिरोहों तक पहुंचना और उन्हें पकड़ना एक बड़ी चुनौती होती है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में राहत की भावना है। लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से अपराधियों में डर पैदा होगा और भविष्य में चोरी की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही, उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया है कि ऐसे अभियानों को लगातार जारी रखा जाए।
पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने वाहनों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। वाहन पार्क करते समय सुरक्षित स्थान का चयन करें और जहां संभव हो, वहां सीसीटीवी की निगरानी सुनिश्चित करें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी गई है।
अंततः, यह कार्रवाई न केवल एक गिरोह के खिलाफ सफलता है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि पुलिस और जनता मिलकर काम करें, तो अपराध पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। हरियाणा पुलिस की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है कि किस तरह संगठित अपराध के खिलाफ ठोस रणनीति बनाकर उसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।

