
हरियाणा में 590 करोड़ का बैंक घोटाला, CBI जांच की तैयारी—बड़े नाम आ सकते हैं सामने
हरियाणा में सामने आए 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में ही कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसके बाद अब इस मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इसी सप्ताह CBI जांच शुरू हो सकती है, जिससे कई बड़े अधिकारियों और अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

ACB की त्वरित कार्रवाई
मामले का खुलासा होते ही एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने तेजी दिखाते हुए केस दर्ज किया और मुख्य आरोपी बैंक मैनेजर रिभव ऋषि को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि रिभव ऋषि ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बड़ी रकम को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा करने के बजाय उसे निजी फायदे के लिए डायवर्ट कर दिया।
यह रकम सरकारी फंड से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे सुरक्षित निवेश के रूप में बैंक में रखा जाना था। लेकिन आरोपी ने अपनी योजना के तहत इस पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया और उसे निजी निवेश में लगा दिया।
नौकरी छोड़ने के बाद भी जारी रहा खेल
इस केस में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रिभव ऋषि करीब छह महीने पहले ही बैंक की नौकरी छोड़ चुका था। इसके बावजूद उसने अपने नेटवर्क और संपर्कों के जरिए इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया। इससे यह साफ होता है कि बैंकिंग सिस्टम के भीतर उसकी पकड़ मजबूत थी और उसे अंदरूनी सहयोग भी मिल रहा था।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नौकरी छोड़ने के बाद भी वह किस तरह बैंक के कामकाज को प्रभावित कर रहा था और किन लोगों ने उसकी मदद की।
रिलेशनशिप मैनेजर बना अहम कड़ी
इस घोटाले में रिलेशनशिप मैनेजर अभय की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि अभय ने रिभव ऋषि की योजना को आगे बढ़ाने में सक्रिय सहयोग किया। वह सरकारी अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें अपनी शाखा में एफडी कराने के लिए राजी करता था।
अभय ने इस साजिश में अपने परिवार को भी शामिल कर लिया। उसने अपनी पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक को इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया, जिससे फंड के लेनदेन को छिपाना आसान हो गया।
फर्जी कंपनी के जरिए मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि स्वाति सिंगला ने ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम से एक कंपनी बनाई थी, जिसमें उसकी 75 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। आरोप है कि इसी कंपनी के जरिए घोटाले की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया गया।
इसके बाद इस पैसे को प्रॉपर्टी खरीदने और शेयर बाजार में निवेश करने में लगाया गया, ताकि पैसे का स्रोत छिपाया जा सके और उसे वैध आय की तरह दिखाया जा सके। यह पूरा प्रोसेस मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके से मेल खाता है, जिसकी अब गहराई से जांच की जा रही है।
अधिकारियों पर भी शक
इस पूरे मामले में सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इतने बड़े स्तर पर रकम के ट्रांसफर और गड़बड़ी बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं मानी जा रही। यही कारण है कि अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, सरकारी फंड को एफडी के रूप में सुरक्षित रखने की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया। आरोपियों ने इस पैसे को सीधे एफडी में डालने के बजाय अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया और फिर उसे निजी निवेश में लगा दिया।
यह घोटाला लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के चलता रहा, जिससे यह भी साफ होता है कि बैंक की आंतरिक निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियां थीं।
CBI जांच से खुलेंगे बड़े राज
अब इस मामले में Central Bureau of Investigation की एंट्री से जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। CBI की जांच में मनी ट्रेल, बैंकिंग रिकॉर्ड और शामिल लोगों की पूरी जानकारी सामने आ सकती है।
अगर CBI जांच शुरू होती है, तो न केवल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों को भी उजागर किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
हरियाणा का यह 590 करोड़ का बैंक घोटाला एक बड़े संगठित आर्थिक अपराध का उदाहरण बनकर सामने आया है। जिस तरह से बैंक अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और फर्जी कंपनियों के जरिए इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया, वह चिंता का विषय है।
अब सबकी नजर CBI जांच पर टिकी है, जो इस मामले के हर पहलू को उजागर कर सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस घोटाले में शामिल कितने बड़े नाम सामने आते हैं और कितनों पर सख्त कार्रवाई होती है।

