
फोरेंसिक जांच से खुलेगा नकली नोट गिरोह का राज, मुख्य आरोपी फरार
प्रयागराज में नकली नोटों के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस अब इस मामले को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने में जुट गई है। गिरोह के खिलाफ ठोस और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस ने जब्त नकली नोटों के नमूने और उनसे जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेज दिया है। माना जा रहा है कि इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ और भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह पूरा मामला उस समय सामने आया था, जब सरायइनायत थाना पुलिस ने एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस को उनके पास से एक लाख से अधिक कीमत के नकली नोट, प्रिंटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी उपकरण मिले थे, जिनका इस्तेमाल नकली करेंसी तैयार करने में किया जा रहा था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे हुए। उन्होंने बताया कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं था, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत नकली नोटों की छपाई और सप्लाई की जा रही थी। इस गिरोह का संचालन देवरिया निवासी विवेक यादव कर रहा था, जो अब भी फरार है और पुलिस की पकड़ से बाहर है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विवेक यादव इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है। उसी के निर्देश पर नकली नोट तैयार किए जाते थे और फिर उन्हें अलग-अलग इलाकों में खपाया जाता था। उसके फरार होने के चलते पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि, उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज और देवरिया पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक जांच का रास्ता अपनाया है। जब्त किए गए नकली नोटों के सैंपल को एफएसएल भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ उनकी गुणवत्ता, प्रिंटिंग तकनीक और असली नोटों से समानता की बारीकी से जांच करेंगे। इससे यह भी पता लगाया जाएगा कि नकली नोट कितने स्तर तक बाजार में खपाए जा सकते थे और उन्हें पहचानना कितना मुश्किल था।
इसके साथ ही जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी गहन जांच की जा रही है। लैपटॉप और मोबाइल फोन में मौजूद डेटा को रिकवर कर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं, किन-किन लोगों से संपर्क था और इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्य इस केस में कई नए खुलासे कर सकते हैं।
फोरेंसिक रिपोर्ट इस पूरे मामले में बेहद अहम साबित होगी। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करेगी, जिससे अदालत में उन्हें सजा दिलाना आसान हो सके। पुलिस का कहना है कि बिना वैज्ञानिक साक्ष्य के इतने बड़े मामले में कड़ी कार्रवाई करना मुश्किल होता है, इसलिए हर पहलू को सावधानी से जांचा जा रहा है।
उधर, इस मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की भी एंट्री हो चुकी है। नकली नोटों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की आशंका के चलते एटीएस भी इस गिरोह के नेटवर्क को खंगाल रही है। एजेंसी यह जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।
पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। मुख्य आरोपी विवेक यादव और उसके एक सहयोगी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूरे गिरोह का पर्दाफाश होगा।
सरायइनायत थानाध्यक्ष संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि नकली नोटों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई और तेज कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
यह मामला न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। नकली नोटों का कारोबार आम जनता को धोखा देने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी कमजोर करता है। ऐसे में इस तरह के गिरोहों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस केस को लेकर पूरी तरह सक्रिय हैं और हर पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं। आने वाले समय में फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस गिरोह के खिलाफ कार्रवाई और भी तेज हो जाएगी।



