
डिजिटल प्रक्रिया से जूझते किसानों को सहारा: शाहपुर मंडी में इनेलो का ‘कष्ट निवारण केंद्र’ बना उम्मीद की नई किरण
अंबाला के शाहपुर अनाज मंडी में किसानों की परेशानियों को दूर करने के लिए एक अहम और सराहनीय पहल सामने आई है। फसल खरीद की प्रक्रिया में तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण और बायोमेट्रिक सिस्टम के लागू होने के बाद जहां पारदर्शिता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर कई किसान, खासकर छोटे और सीमांत, तकनीकी जटिलताओं में उलझते नजर आ रहे हैं। ऐसे हालात में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) द्वारा स्थापित ‘कष्ट निवारण केंद्र’ किसानों के लिए राहत का केंद्र बनकर उभरा है।

इस केंद्र की स्थापना का निर्णय अंबाला छावनी में आयोजित एक बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष जगमाल सिंह रोलों ने की। बैठक में किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया और इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण कई किसान अपनी फसल बेचने में असमर्थ हो रहे हैं।
आज के समय में फसल बेचने के लिए किसानों को बायोमेट्रिक सत्यापन, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और गेट पास जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। हालांकि ये सभी प्रक्रियाएं पारदर्शिता और सुविधा के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर किसान इन तकनीकों से परिचित नहीं है। खासकर बुजुर्ग किसान और वे लोग, जो डिजिटल साधनों का कम इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है।
इनेलो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रकाश भारती और महासचिव शीशपाल जंधेडी ने इस मौके पर कहा कि सरकार की नीतियां तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ हर किसान तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि कई किसान केवल इसलिए अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया या बायोमेट्रिक सिस्टम की पूरी जानकारी नहीं है।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए शाहपुर मंडी में ‘कष्ट निवारण केंद्र’ शुरू किया गया है। इस केंद्र पर पार्टी के प्रशिक्षित कार्यकर्ता किसानों की हर संभव मदद के लिए मौजूद रहेंगे। वे किसानों को रजिस्ट्रेशन कराने, बायोमेट्रिक सत्यापन करने और गेट पास बनवाने में सहायता करेंगे। इसके अलावा यदि किसी किसान को प्रशासनिक स्तर पर कोई परेशानी आती है, तो उसे भी तुरंत हल करने का प्रयास किया जाएगा।
इस केंद्र का उद्देश्य केवल तकनीकी सहायता देना नहीं है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। कार्यकर्ता किसानों को यह भी समझाएंगे कि वे भविष्य में खुद इन प्रक्रियाओं को कैसे आसानी से पूरा कर सकते हैं। इससे किसानों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे डिजिटल बदलाव के साथ कदम मिला सकेंगे।
किसानों के बीच इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई किसानों ने बताया कि पहले उन्हें छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए बार-बार मंडी आना पड़ता था और कई बार बिना काम के लौटना पड़ता था। अब इस केंद्र के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान एक ही जगह पर हो रहा है, जिससे उनका समय और मेहनत दोनों बच रहे हैं।
बैठक में मौजूद अन्य पदाधिकारियों—जैसे तेजपाल शर्मा, चरनजीत मोहड़ी और रूबल छपरा—ने भी इस पहल की सराहना की और इसे किसानों के हित में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो इस तरह के केंद्र अन्य मंडियों में भी खोले जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ किसानों को प्रशिक्षित करना भी उतना ही जरूरी है। यदि किसानों को सही मार्गदर्शन और सहायता नहीं मिलेगी, तो वे इन नई प्रणालियों से दूर हो जाएंगे और इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ेगा।
शाहपुर मंडी में शुरू किया गया यह केंद्र एक उदाहरण है कि कैसे जमीनी स्तर पर काम करके वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। यह पहल न केवल किसानों की मौजूदा परेशानियों को दूर करेगी, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए भी तैयार करेगी।
हालांकि, यह भी जरूरी है कि इस तरह की पहलें केवल राजनीतिक गतिविधि तक सीमित न रहें, बल्कि इन्हें स्थायी रूप से लागू किया जाए। सरकार और प्रशासन को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए ताकि हर मंडी में किसानों के लिए सहायता केंद्र उपलब्ध हो।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि आज के दौर में केवल नीतियां बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सही तरीके से लागू करना और आम लोगों तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब तक हर किसान इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाएगा, तब तक डिजिटल क्रांति अधूरी ही रहेगी।
अंततः, शाहपुर मंडी में स्थापित ‘कष्ट निवारण केंद्र’ किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह केंद्र न केवल उनकी समस्याओं का समाधान करेगा, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यदि इस तरह की पहलें निरंतर जारी रहती हैं और अन्य क्षेत्रों में भी लागू की जाती हैं, तो यह निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होंगी। किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटाने और उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने की दिशा में यह एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है।

