
करनाल में गैस डिलीवरी में बड़ा खेल: डिलीवरी बॉय पर 13 सिलिंडर गबन और उपभोक्ताओं से ठगी के आरोप
हरियाणा के करनाल जिले के निगदू कस्बे से गैस वितरण से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने उपभोक्ताओं और एजेंसी संचालकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। एक इंडेन ग्रामीण गैस एजेंसी में कार्यरत डिलीवरी बॉय पर 13 गैस सिलिंडर हड़पने, उपभोक्ताओं को गुमराह करने और धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एजेंसी और कर्मचारी के बीच भरोसे का टूटना
यह पूरा मामला निगदू स्थित एक गैस एजेंसी से जुड़ा है, जो मीणा चौहान के नाम से संचालित होती है। एजेंसी के कामकाज की देखरेख उनके पति लक्ष्मी चंद चौहान करते हैं, जो रायसन के निवासी हैं।
लक्ष्मी चंद चौहान के अनुसार, बीर बडालवा गांव का रहने वाला रोहित पिछले चार महीनों से एजेंसी में डिलीवरी बॉय के रूप में काम कर रहा था। उसका काम घर-घर जाकर गैस सिलिंडर पहुंचाना था और इसके लिए उसे 10 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था।
अचानक गायब होने से बढ़ा शक
मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब 6 मार्च को वेतन लेने के बाद रोहित ने अगले ही दिन से काम पर आना बंद कर दिया। शुरू में इसे सामान्य अनुपस्थिति समझा गया, लेकिन जब कई दिनों तक वह नहीं लौटा, तो एजेंसी संचालकों को शक होने लगा।
जब उससे संपर्क किया गया, तो उसने साफ शब्दों में कहा कि वह अब एजेंसी में काम नहीं करना चाहता और नौकरी छोड़ रहा है। इसके बाद उससे एजेंसी की डिलीवरी गाड़ी और गैस सिलिंडरों का पूरा हिसाब मांगा गया।
समय मांगकर किया टालमटोल
शिकायत के अनुसार, रोहित ने 17 मार्च को एजेंसी का पूरा चार्ज देने और हिसाब-किताब साफ करने के लिए दो दिन का समय मांगा। एजेंसी संचालकों ने उस पर भरोसा करते हुए समय दे दिया।
लेकिन तय समय बीतने के बाद भी न तो वह एजेंसी पहुंचा और न ही कोई जानकारी दी। इसके बाद एजेंसी संचालकों ने आंतरिक जांच शुरू की, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
13 सिलिंडरों का गबन सामने आया
जांच के दौरान पाया गया कि एजेंसी के 13 गैस सिलिंडर रिकॉर्ड से गायब हैं। आरोप है कि रोहित ने इन सिलिंडरों को हड़प लिया और संभवतः अन्य लोगों के साथ मिलकर उनकी कालाबाजारी कर रहा है।
यह सिर्फ आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी टूट रहा है।
डिलीवरी कोड लेकर भी नहीं दी सप्लाई
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि आरोपी पर उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी करने का भी आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि रोहित ने कई ग्राहकों से उनके मोबाइल फोन पर आए डिलीवरी कोड (DAC) ले लिए, लेकिन उन्हें गैस सिलिंडर नहीं दिए।
जब उपभोक्ताओं ने एजेंसी में जाकर स्थिति की जांच की, तो सिस्टम में उनके सिलिंडर को पहले ही डिलीवर दिखाया जा चुका था। इससे उपभोक्ताओं को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उन्हें दोबारा सिलिंडर बुक करने की परेशानी भी झेलनी पड़ी।
निजी मोबाइल से काम करना बना शक की वजह
एजेंसी संचालक के अनुसार, रोहित पिछले दो महीनों से एजेंसी द्वारा दिए गए आधिकारिक मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं कर रहा था। वह अपने निजी मोबाइल नंबर से ही ग्राहकों से संपर्क कर रहा था।
इस कारण उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखना मुश्किल हो गया था, जिसका फायदा उठाकर उसने कथित रूप से यह घोटाला किया।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
इस पूरे मामले में निगदू थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या यह अकेले आरोपी का काम है।
गैस वितरण व्यवस्था पर सवाल
यह घटना गैस वितरण प्रणाली में मौजूद खामियों को उजागर करती है। एक डिलीवरी बॉय द्वारा इतनी बड़ी गड़बड़ी करना यह दर्शाता है कि निगरानी और नियंत्रण प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग, GPS सिस्टम और सख्त ऑडिट प्रक्रिया लागू करके इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
उपभोक्ताओं में असुरक्षा का माहौल
इस घटना के बाद स्थानीय उपभोक्ताओं में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। लोग अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या उन्हें सही तरीके से गैस सिलिंडर मिल रहे हैं या नहीं।
कई उपभोक्ताओं ने अपने पिछले ऑर्डर की जांच भी शुरू कर दी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं उनके साथ भी धोखाधड़ी तो नहीं हुई।
निष्कर्ष
करनाल के निगदू का यह मामला केवल एक व्यक्ति की कथित धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है। 13 गैस सिलिंडरों का गायब होना और उपभोक्ताओं को बिना डिलीवरी के सिस्टम में ‘डिलीवर’ दिखाना एक गंभीर अपराध है।
अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि आरोपी को कब तक गिरफ्तार किया जाता है और क्या इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आती है।
साथ ही, यह घटना गैस एजेंसियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक चेतावनी है कि सतर्कता और पारदर्शिता ही इस तरह के घोटालों को रोकने का सबसे बड़ा उपाय है।

