
फर्जी पुलिस बन ठगी, जेल में बिताई सजा ही मानी काफी
फर्जी पुलिसकर्मी बनकर युवक को साइबर अपराध में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठने के मामले में जिला अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए उनके द्वारा पहले से जेल में बिताए गए समय को ही पर्याप्त सजा मान लिया और रिहाई के आदेश दे दिए। यह फैसला अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश सुनील चौहान की अदालत ने सुनाया।

मामले की शुरुआत एक जून 2023 को हुई, जब पवन कुमार साहू ने सदर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि एक डेटिंग एप के जरिए उनकी पहचान मोहित टांक नाम के युवक से हुई थी। मोहित ने उन्हें मिलने के लिए साइबर पार्क बुलाया। जब पवन वहां पहुंचे तो अचानक स्थिति बदल गई।
शिकायत के अनुसार, वहां पहले से मौजूद दो युवकों ने उन्हें जबरन एक गाड़ी में बैठा लिया। दोनों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और आरोप लगाया कि पवन साइबर अपराध में शामिल हैं। इसके बाद उन्हें सेक्टर-39 स्थित अपराध शाखा की ओर ले जाया गया। रास्ते में एक और व्यक्ति गाड़ी में सवार हुआ, जिसे आरोपियों ने अपना वरिष्ठ अधिकारी बताया।
इसके बाद आरोपियों ने पवन को धमकाते हुए कहा कि यदि वह मामले में फंसने से बचना चाहते हैं तो उन्हें एक लाख रुपये देने होंगे। काफी बातचीत के बाद यह रकम 50 हजार रुपये पर तय हो गई। डर के कारण पवन ने अपने भाई से संपर्क कर पैसे मंगवाए और आरोपियों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में सुनवाई के दौरान सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मोहित और देवकी नंदन को दोषी पाया गया। हालांकि अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि दोनों आरोपी पहले ही लंबे समय तक जेल में रह चुके हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार, देवकी नंदन 14 जून 2023 से 30 अप्रैल 2024 तक जेल में बंद रहा, जबकि मोहित 14 जून 2023 से 14 मार्च 2024 तक हिरासत में रहा। इसी आधार पर अदालत ने उनके जेल में बिताए समय को ही सजा मानते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।

