
मौसम का डबल अटैक: कहीं आंधी-बारिश का कहर, तो कहीं चढ़ता पारा बढ़ाएगा मुश्किलें
देश में मार्च के आखिरी सप्ताह में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और आने वाले दिन कई राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार, एक के बाद एक सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ और अन्य मौसमी सिस्टम देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रभाव डालेंगे। कहीं तेज आंधी और बारिश से जनजीवन प्रभावित होगा, तो कहीं तापमान में तेजी से बढ़ोतरी लोगों को गर्मी का अहसास कराएगी।

26 मार्च से उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने लगेगा। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। राजधानी दिल्ली में विशेष रूप से धूल भरी आंधी चल सकती है, जिससे सड़कों पर दृश्यता कम हो सकती है और ट्रैफिक पर असर पड़ सकता है। ऐसे में वाहन चालकों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
इसके दो दिन बाद यानी 28 मार्च को राजस्थान में भी मौसम इसी तरह करवट ले सकता है। यहां तेज हवाएं और धूल भरी आंधी चलने के आसार हैं, जिससे दैनिक जीवन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। खुले में काम करने वाले लोगों और किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में भी मौसम शांत नहीं रहेगा। जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में 26 मार्च को बारिश के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। इसके बाद 27 मार्च को उत्तराखंड में भी इसी तरह का मौसम देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे ठंड का असर बढ़ सकता है और आवाजाही में बाधा आ सकती है।
पूर्वोत्तर भारत में मौसम पहले से ज्यादा सक्रिय हो गया है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश का अनुमान है। इन राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां 64.5 से 115.5 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। भारी बारिश के कारण जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसके अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी गरज-चमक, बिजली गिरने और मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है।
दक्षिण और पश्चिम भारत में भी मौसम में हलचल देखने को मिलेगी। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और मध्य क्षेत्रों में तेज हवाओं और बिजली के साथ हल्की बारिश हो सकती है। वहीं आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में चक्रवाती परिसंचरण के कारण मौसम बिगड़ सकता है। इन इलाकों में भी अचानक तेज हवाएं और बारिश लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
इस बीच, देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों के दौरान तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं मध्य और पूर्वी भारत में भी पारा चढ़ने की संभावना है। दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में तापमान पहले ही 36 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।
गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और ओडिशा में गर्मी का असर स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। खासतौर पर केरल और गोवा में उमस भरा मौसम लोगों को ज्यादा परेशान कर सकता है।
मौसम के इस अचानक बदलाव का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण खड़ी फसलों को नुकसान होने का खतरा है। खासकर फलदार फसलें जैसे केला और पपीता ज्यादा संवेदनशील होती हैं, जिन्हें नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपनी फसलों की सुरक्षा के उपाय करें।
इसके अलावा, तेज हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने या उनकी शाखाओं के टूटने का खतरा बना रहता है, जिससे बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंच सकता है। ओलावृष्टि के दौरान खुले में मौजूद लोगों और पशुओं के लिए जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी जाती है।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी तेज आंधी, बिजली और ओलावृष्टि की संभावना है। यहां हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है और फसलों को नुकसान हो सकता है।
कुल मिलाकर, आने वाले दिन देश के लिए मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरे रहेंगे। एक ओर जहां कुछ क्षेत्रों में बारिश और आंधी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बढ़ती गर्मी लोगों के लिए नई चुनौती लेकर आएगी। ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं।
मौसम का यह बदलता स्वरूप इस बात का संकेत भी है कि जलवायु में अस्थिरता बढ़ रही है। इसलिए न केवल सरकारों बल्कि आम नागरिकों को भी इसके प्रति जागरूक होना होगा, ताकि भविष्य में आने वाली ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निmपटा जा सके।
