दिल्ली

बदलती दिल्ली की सवारी—ई-बसों की रफ्तार, घटते निजी वाहन और हरित भविष्य की ओर कदम

राजधानी दिल्ली की तस्वीर तेजी से बदल रही है, खासकर उसके परिवहन तंत्र में। जहां कभी सड़कों पर निजी वाहनों की भरमार और प्रदूषण का दबाव साफ नजर आता था, वहीं अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में तेज वृद्धि, निजी वाहनों में गिरावट और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार यह दिखाता है कि शहर अब एक अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

पिछले एक साल में दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में जो उछाल आया है, वह अभूतपूर्व है। अप्रैल 2025 में जहां कुल 2,150 ई-बसें थीं, वहीं मार्च 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 4,338 हो गई। यानी लगभग दोगुनी वृद्धि। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि उस दिशा का संकेत है जिसमें दिल्ली आगे बढ़ना चाहती है—एक ऐसी परिवहन व्यवस्था जो प्रदूषण कम करे और यात्रियों को बेहतर सुविधा दे।

सरकार का लक्ष्य यहीं नहीं रुकता। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,600 नई बसों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इनमें से कुछ बसें मेट्रो फीडर के रूप में काम करेंगी, जिससे लोगों को घर से मेट्रो स्टेशन तक और वहां से अपने गंतव्य तक पहुंचने में आसानी होगी। इसके अलावा 2,800 नई इलेक्ट्रिक बसों की मांग रखी गई है, जो आने वाले समय में दिल्ली के बस नेटवर्क को और मजबूत बनाएंगी।

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और परिवहन विभाग के बीच इन बसों का वितरण भी तय किया गया है। 1,380 बसें डीटीसी को दी जाएंगी, जबकि 1,420 बसें परिवहन विभाग के तहत संचालित होंगी। साथ ही, केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत 3,330 अतिरिक्त ईवी बसों का प्रस्ताव भेजा गया है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का सबसे बड़ा उदाहरण बन सकती है।

परिवहन क्षेत्र में इस बड़े बदलाव के लिए सरकार ने भारी निवेश भी किया है। वर्ष 2025-26 के लिए 12,111 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इसमें से 20 मार्च 2026 तक 10,341 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें तेजी से लागू भी किया जा रहा है।

दिल्ली में निजी वाहनों की संख्या में आई गिरावट भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू है। वर्ष 2024-25 में कुल पंजीकृत निजी वाहनों की संख्या घटकर 81,18,294 रह गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में 51,905 कम है। भले ही प्रतिशत के हिसाब से यह गिरावट छोटी लगे, लेकिन एक ऐसे शहर के लिए जहां वर्षों से वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, यह एक बड़ा बदलाव है।

इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण पुराने वाहनों पर लगाया गया प्रतिबंध है। 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को हटाने की नीति के तहत अब तक 64 लाख से अधिक वाहनों को डी-रजिस्टर किया जा चुका है। इससे सड़कों पर पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहन कम हुए हैं।

इसके अलावा, लोगों का रुझान भी बदल रहा है। बढ़ते ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर मोड़ा है। मेट्रो और बसें अब केवल मजबूरी नहीं, बल्कि सुविधा का साधन बनती जा रही हैं।

दिल्ली मेट्रो इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। वर्तमान में इसकी औसत दैनिक यात्री संख्या लगभग 67 लाख तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि मेट्रो न केवल समय बचाती है, बल्कि लोगों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प भी बन चुकी है। मेट्रो के विस्तार से शहर के दूर-दराज के इलाकों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल रही है।

बस परिवहन भी पीछे नहीं है। मार्च 2026 तक दिल्ली में कुल 6,100 बसों का बेड़ा मौजूद है। इनमें इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। आने वाले समय में यह उम्मीद की जा रही है कि डीजल और सीएनजी बसों की जगह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बसें ले लेंगी, जिससे वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।

इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भी दिल्ली ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 20 मार्च 2026 तक राजधानी में लगभग 4.7 लाख ई-वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दोपहिया और तिपहिया वाहनों की है। यह दर्शाता है कि आम नागरिक भी अब इलेक्ट्रिक विकल्पों को अपनाने लगे हैं।

दिल्ली में कुल वाहनों की संख्या 87.61 लाख है, जिसमें दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा यानी करीब 68 प्रतिशत है। यदि इन वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक में बदला जाए, तो प्रदूषण पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

सरकार ने इस दिशा में लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी भी दी है। दिल्ली ईवी नीति के तहत अब तक 91,031 लोगों को 203.35 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना आसान हुआ है और लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।

डिजिटल सुविधाओं के मामले में भी दिल्ली ने प्रगति की है। परिवहन विभाग ने फेसलेस सेवाओं को लागू कर दिया है, जिससे 54 लाख से अधिक लोगों को फायदा हुआ है। अब लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और अन्य सेवाओं के लिए लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं है।

‘वन दिल्ली’ मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को ईवी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों की जानकारी मिल रही है। यह सुविधा खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग करते हैं और उन्हें चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी चाहिए होती है।

महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना भी इस परिवर्तन का अहम हिस्सा है। वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 56.21 करोड़ महिला यात्रियों ने इस योजना का लाभ उठाया। इस पर सरकार ने 562.17 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस योजना ने महिलाओं की यात्रा को सुरक्षित और सुलभ बनाया है।

समग्र रूप से देखा जाए तो दिल्ली का परिवहन तंत्र एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार, मेट्रो की बढ़ती पहुंच, निजी वाहनों में कमी और डिजिटल सेवाओं का विकास—ये सभी संकेत देते हैं कि दिल्ली एक स्मार्ट और हरित शहर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और स्पष्ट होगा, और दिल्ली देश के अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।

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