हरियाणा

आरटीई नियमों की अनदेखी से मचा हड़कंप: करनाल में हजारों बच्चों का भविष्य अधर में

हरियाणा के करनाल जिले में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम को लेकर एक गंभीर स्थिति सामने आई है, जिसने हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन निजी स्कूलों की लापरवाही के कारण करीब दस हजार बच्चों के दाखिले अभी तक अटके हुए हैं। यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जिले के 160 निजी सीबीएसई स्कूलों में से 58 स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक एंट्री लेवल कक्षाओं के लिए आरटीई के तहत आरक्षित सीटों का विवरण एमआईएस पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है। शिक्षा विभाग द्वारा इसके लिए 20 मार्च तक की समयसीमा तय की गई थी। विभाग ने कई बार स्कूलों को नोटिस और निर्देश जारी किए, लेकिन इसके बावजूद इन स्कूलों ने नियमों की अनदेखी जारी रखी।

आरटीई कानून के अनुसार, निजी स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। करनाल जिले में यह संख्या लगभग दस हजार सीटों के आसपास बैठती है। लेकिन जब स्कूल ही इन सीटों का डेटा साझा नहीं कर रहे, तो इन पर दाखिले की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़े—यह एक बड़ा सवाल बन गया है।

इस स्थिति के कारण अभिभावकों में भारी असमंजस की स्थिति है। कई माता-पिता पिछले कई दिनों से स्कूलों और शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो स्पष्ट जानकारी मिल रही है और न ही कोई ठोस समाधान। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके लिए यह स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि वे अपने बच्चों की शिक्षा के लिए आरटीई पर ही निर्भर हैं।

शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। जिन स्कूलों ने डेटा अपलोड नहीं किया है, उनका एमआईएस पोर्टल फिलहाल बंद कर दिया गया है। साथ ही, इन स्कूलों पर पांच हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है। विभाग का स्पष्ट कहना है कि जब तक स्कूल जुर्माना नहीं भरेंगे और आवश्यक डेटा अपलोड नहीं करेंगे, तब तक उन्हें पोर्टल की सुविधा नहीं दी जाएगी।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नीलम कुंडू के अनुसार, विभाग ने स्कूलों को पर्याप्त समय और अवसर दिए थे। इसके बावजूद यदि स्कूल अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

जिला शिक्षा अधिकारी रोहतास वर्मा ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सभी 58 स्कूलों की सूची तैयार कर ली गई है और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई स्कूल जुर्माना भरने में देरी करता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्कूल प्रबंधन की होगी।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस लापरवाही में सबसे अधिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। कुल 17 सीनियर सेकेंडरी, 22 हाई स्कूल, 12 मिडिल स्कूल और 7 प्राइमरी स्कूलों ने डेटा अपलोड नहीं किया है। ब्लॉक स्तर पर भी यह समस्या व्यापक रूप से फैली हुई है। करनाल ब्लॉक में सबसे अधिक 36 स्कूल हैं, जबकि नीलोखेड़ी, असंध, निसिंग, घरौंडा और इंद्री ब्लॉकों से भी कई स्कूल इस सूची में शामिल हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती दिखाई जाती और स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इसके अलावा, डिजिटल पोर्टल की कार्यप्रणाली को भी और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि ऐसी समस्याओं से समय रहते निपटा जा सके।

इस संकट का सबसे बड़ा असर उन बच्चों पर पड़ रहा है, जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनके लिए आरटीई केवल एक योजना नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद है। लेकिन जब यही उम्मीद अधूरी रह जाती है, तो इसका असर उनके आत्मविश्वास और शिक्षा के अधिकार पर पड़ता है।

अभिभावकों की मांग है कि सरकार और शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करें और जल्द से जल्द समाधान निकालें। वे चाहते हैं कि स्कूलों को सख्ती से नियमों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए और दाखिला प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए।

अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि करनाल में आरटीई दाखिलों का यह संकट केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का मुद्दा है। यदि समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हजारों बच्चों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और स्कूल इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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