
हाईवे बना मौत का रास्ता: ससुराल से लौटते वक्त युवक की दर्दनाक मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
आगरा-इटावा स्टेट हाईवे पर एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। रविवार देर रात हुए एक सड़क हादसे में 35 वर्षीय युवक की जान चली गई। यह दुर्घटना बाह क्षेत्र के बड़ागांव के पास रात करीब 10:15 बजे हुई, जब एक अज्ञात वाहन ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।

मृतक की पहचान जैतपुर थाना क्षेत्र के पहाड़पुरा गांव निवासी देवेन्द्र के रूप में हुई है। वह अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था और जयपुर में नग (आभूषण) बनाने का काम करता था। अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने वाला देवेन्द्र अचानक इस हादसे का शिकार हो गया, जिससे उसके घर में मातम छा गया।
जानकारी के अनुसार, देवेन्द्र की पत्नी शिल्पी कुछ दिन पहले किसी पारिवारिक कारण से नाराज होकर अपने मायके चौरंगाहार चली गई थी। पत्नी को मनाने और वापस घर लाने के लिए देवेन्द्र जयपुर से गांव आया था। रविवार को वह अपनी बाइक से ससुराल पहुंचा और बातचीत के बाद अकेले ही वापस लौटने लगा। लेकिन किसे पता था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
रास्ते में बड़ागांव के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। आसपास के लोगों ने जैसे ही हादसे की आवाज सुनी, वे तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल देवेन्द्र को संभालने की कोशिश की। सूचना मिलते ही एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची और उसे तुरंत बाह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बाह की मोर्चरी में रखवा दिया। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है ताकि आरोपी वाहन की पहचान की जा सके।
देवेन्द्र की मौत ने उसके परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। वह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। उसके छोटे भाई धर्मेन्द्र ने बताया कि देवेन्द्र कुछ ही दिन पहले जयपुर से घर लौटा था और पत्नी को मनाकर वापस लाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि देवेन्द्र अपने पीछे तीन छोटी बेटियों—प्रतिज्ञा, आराध्या और साराध्या—को छोड़ गया है। इन मासूम बच्चियों के सिर से पिता का साया उठ गया है, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। परिवार में कोई और स्थायी कमाने वाला नहीं है, ऐसे में अब उनकी परवरिश की जिम्मेदारी पूरी तरह उनकी मां शिल्पी पर आ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आगरा-इटावा हाईवे पर इस तरह के हादसे आम होते जा रहे हैं। रात के समय तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। कई बार प्रशासन से इस मार्ग पर सुरक्षा बढ़ाने और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे आगे भी लोगों की जान लेते रहेंगे। पुलिस का कहना है कि आरोपी वाहन चालक को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, देवेन्द्र के घर में गम का माहौल है। परिवार के लोग इस हादसे से उबर नहीं पा रहे हैं। गांव में भी शोक की लहर है और हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है। यह हादसा न केवल एक व्यक्ति की मौत है, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों और उम्मीदों के टूटने की कहानी भी है।



