
गोरखपुर हत्याकांड में नया मोड़: पत्नी बोलीं— साजिश में बड़े लोग शामिल, पुलिस बचा रही आरोपितों को
गोरखपुर में प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार चौहान की हत्या का मामला अब और ज्यादा उलझता जा रहा है। जहां एक ओर पुलिस इस हत्याकांड का खुलासा कर चुकी है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार पुलिस की जांच पर ही सवाल खड़े कर रहा है। मृतक की पत्नी ने खुलकर आरोप लगाया है कि यह हत्या एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी और इसमें कई प्रभावशाली लोग शामिल हैं, जिन्हें पुलिस बचाने की कोशिश कर रही है।

शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में राजकुमार चौहान की पत्नी सुशीला देवी ने कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके पति की हत्या कोई सामान्य वारदात नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें गांव के कुछ प्रभावशाली लोग शामिल थे। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोपितों की अवैध संपत्ति जब्त करने तक की बात कही।
सुशीला देवी के अनुसार, इस हत्या के पीछे गांव के पार्षद धर्मदेव चौहान, दीपक गौड़, शेष यादव, लालजी यादव उर्फ गट्टू सहित कुल नौ लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पुलिस को इन सभी नामजद लोगों के खिलाफ तहरीर दी थी, जिसके आधार पर मुकदमा भी दर्ज किया गया। लेकिन इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई संदेह के घेरे में है।
उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले को भटकाने के लिए केवल दो लोगों— डंपर चालक राज चौहान और विपिन यादव— को मुख्य आरोपी बनाकर गिरफ्तारी की है, जबकि असली साजिशकर्ताओं को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जानबूझकर जांच को दूसरी दिशा में मोड़ दिया है, ताकि बड़े नामों को इस मामले से बाहर रखा जा सके।
सुशीला देवी ने यह भी दावा किया कि हत्या से पहले उनके पति को लगातार धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने बताया कि होली के दिन दीपक गौड़ ने मुख्य आरोपी राज चौहान को अपने घर बुलाया था, जिससे इस साजिश की नींव रखी गई। उसी दिन शेष यादव ने उनके पति को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने इन बिंदुओं को गंभीरता से नहीं लिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि हत्या के बाद उनके पति के गले से लूटी गई चेन अब तक बरामद क्यों नहीं हुई। अगर पुलिस सही दिशा में जांच कर रही है, तो ऐसे अहम साक्ष्य अब तक सामने क्यों नहीं आए? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक प्रभावशाली व्यक्ति पूरे मामले को दबाने में लगा हुआ है और पुलिस पर भी दबाव बनाया जा रहा है।
सुशीला देवी ने मांग की कि सभी नामजद आरोपितों के कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट की जांच की जाए। उनका कहना है कि अगर यह जांच ईमानदारी से की जाए, तो साजिश का पूरा सच सामने आ जाएगा। उन्होंने उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की है।
वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अब तक की जांच के आधार पर दो आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने यह भी बताया कि हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद कर लिया गया है। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में केवल दो ही हमलावर नजर आए हैं, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई है।
एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने सुशीला देवी द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
अगर पूरे मामले की बात करें, तो यह घटना 17 मार्च की सुबह की है, जब चिलुआताल थाना क्षेत्र के बरगदवा गांव में रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार चौहान रोज की तरह टहलने निकले थे। इसी दौरान पहले उन्हें गोली मारी गई और फिर चाकुओं से गोदकर उनकी हत्या कर दी गई। यह वारदात इतनी अचानक और निर्मम थी कि पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मृतक की पत्नी की तहरीर पर भाजपा पार्षद धर्मदेव चौहान समेत आठ लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने राज चौहान और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि अन्य आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।
लेकिन अब पीड़ित परिवार पुलिस की इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि असली साजिशकर्ता अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें बचाने के लिए जांच को कमजोर किया जा रहा है।
इस मामले ने न केवल गोरखपुर में हलचल मचा दी है, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां पुलिस अपनी जांच को सही ठहरा रही है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है।
फिलहाल यह मामला पूरी तरह से जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में ही यह साफ हो पाएगा कि इस हत्याकांड के पीछे असली साजिश क्या थी और कौन-कौन इसमें शामिल थे। लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हर पीड़ित को समय पर और निष्पक्ष न्याय मिल पाता है या नहीं।



