
मार्च में मौसम का बड़ा यू-टर्न: आंधी, बारिश और बर्फबारी से उत्तर भारत में ठंड की वापसी
मार्च का महीना आमतौर पर सर्दियों की विदाई और गर्मी की दस्तक के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने बिल्कुल अलग रुख अपना लिया है। उत्तर भारत के कई राज्यों में अचानक मौसम बदलने से लोगों को एक बार फिर ठंड का सामना करना पड़ रहा है। आसमान में घने बादल, तेज हवाएं, बारिश और पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी ने पूरे माहौल को सर्द बना दिया है।

इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ को माना जा रहा है, जो इस समय काफी सक्रिय है। इसके प्रभाव से पहाड़ी इलाकों में लगातार बर्फबारी हो रही है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की जा रही है। दिल्ली-एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहे और कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। इससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को ठंड का अहसास हुआ।
राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मौसम का यह बदला रूप लोगों के लिए थोड़ा असामान्य है। सुबह की ठंडी हवाओं ने लोगों को फिर से हल्के गर्म कपड़े पहनने पर मजबूर कर दिया। दिन में भी धूप नहीं निकलने के कारण ठंड बनी रही। शाम के समय तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने माहौल को और ज्यादा ठंडा कर दिया।
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में स्थिति और ज्यादा गंभीर है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी ने ठंड को और बढ़ा दिया है। कई जगहों पर सड़कें बर्फ से ढक गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने और जरूरी न होने पर यात्रा टालने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। अनुमान है कि इस दौरान तेज हवाएं चलेंगी, जिनकी गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश और ओलावृष्टि होने की संभावना है। आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है, जो जान-माल के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
20 मार्च को देश के कई राज्यों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंधी, बारिश और ओले गिरने की संभावना जताई गई है। इन परिस्थितियों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
इस बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। रबी की फसलें इस समय पककर तैयार हो रही हैं और कटाई के लिए तैयार हैं। ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। गेहूं, सरसों और चने की फसलें विशेष रूप से प्रभावित हो सकती हैं। कई किसानों ने पहले ही अपनी फसलों के नुकसान की आशंका जताई है।
राजस्थान में भी मौसम ने करवट ली है। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अजमेर और कोटा जैसे शहरों में बादल छाए हुए हैं और कुछ जगहों पर हल्की बारिश भी हुई है। तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन ठंड का अहसास भी बढ़ गया है।
जम्मू-कश्मीर में ठंड की वापसी ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। घाटी में लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण ठंड बढ़ गई है। कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीति, कुल्लू, शिमला और कांगड़ा जैसे क्षेत्रों में भारी बर्फबारी का अनुमान है।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भी मौसम खराब बना हुआ है। यहां लगातार बर्फबारी और बारिश हो रही है, जिससे रास्ते बंद होने की आशंका है। यात्रियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मौसम का असर देखा जा रहा है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और छत्तीसगढ़ में आंधी-तूफान और तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में भी बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है।
मौसम में आए इस बदलाव ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर अचानक आई ठंड और बारिश ने कई समस्याएं खड़ी कर दी हैं। सड़कें गीली होने से फिसलन बढ़ गई है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें। खुले स्थानों पर खड़े न रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण लेने से बचें। किसानों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, उत्तर भारत में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज आने वाले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के कारण बारिश, तेज हवाएं और ठंड का असर जारी रहेगा। ऐसे में लोगों को सतर्क रहना होगा और मौसम से जुड़ी सभी सावधानियों का पालन करना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके।
