
बयान पर बवाल—आदित्य देवीलाल ने कादियान से मांगी माफी, नहीं तो मानहानि की चेतावनी
हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के डबवाली से विधायक आदित्य देवीलाल ने निर्दलीय विधायक देवेंद्र कादियान पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है। आदित्य देवीलाल का कहना है कि कादियान ने मीडिया में इनेलो विधायकों को लेकर जो बयान दिया है, वह पूरी तरह झूठा, भ्रामक और बेबुनियाद है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि कादियान अपने बयान को वापस लेकर माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया जाएगा।

दरअसल, विवाद की जड़ राज्यसभा चुनाव से जुड़ी है। निर्दलीय विधायक देवेंद्र कादियान ने यह दावा किया था कि राज्यसभा चुनाव के दौरान आजाद उम्मीदवार सतीश नांदल के नामांकन में तीन निर्दलीय विधायकों के साथ-साथ इनेलो के दोनों विधायक भी शामिल थे और उनकी सहमति से ही नांदल ने नामांकन दाखिल किया था। इसी बयान को लेकर आदित्य देवीलाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
आदित्य देवीलाल ने कादियान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से झूठ का पुलिंदा है और इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल इनेलो की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हैं, बल्कि जनता को गुमराह करने का प्रयास भी हैं। उनके अनुसार, कादियान का यह बयान उनके समर्थित उम्मीदवार की हार की बौखलाहट को दर्शाता है।
उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा इस नतीजे को स्वीकार नहीं कर पा रही है। आदित्य देवीलाल ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए हर संभव प्रयास किया, यहां तक कि कांग्रेस विधायकों को भी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इसी हार की हताशा में अब इनेलो को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है और इसके लिए देवेंद्र कादियान जैसे विधायकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आदित्य देवीलाल ने आगे कहा कि इनेलो के दोनों विधायकों ने राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी थी और उनका किसी भी उम्मीदवार के नामांकन से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने भगवान को साक्षी मानकर यह शपथ भी ली कि न तो वे और न ही उनके साथी विधायक किसी नामांकन प्रक्रिया में शामिल हुए थे और न ही उनकी पार्टी का सतीश नांदल को उम्मीदवार बनाने में कोई योगदान था।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में कोई भी बात छुपी नहीं रह सकती। मीडिया और वीडियो फुटेज के माध्यम से सब कुछ सामने आ चुका है। उनके अनुसार, नामांकन के समय केवल तीन निर्दलीय विधायक मौजूद थे और जो सहमति पत्र दिया गया था, उसमें इनेलो विधायकों का नाम शामिल नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसे में कादियान का बयान पूरी तरह से तथ्यहीन है।
आदित्य देवीलाल ने मुख्यमंत्री पर भी परोक्ष रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने घर की स्थिति को देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के ही एक विधायक ने जानबूझकर अपना वोट रद्द कराया, जिसके चलते कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे पहले अपनी पार्टी के भीतर की स्थिति को संभालें और “काली भेड़” की पहचान करें।
इस पूरे मामले में आदित्य देवीलाल ने देवेंद्र कादियान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपने बयान को तुरंत वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो इनेलो पार्टी उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप में उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएगी।
इसके साथ ही आदित्य देवीलाल ने निर्दलीय विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता किसी निर्दलीय उम्मीदवार को इसलिए चुनती है ताकि वह निष्पक्ष रहकर जनता की आवाज बने, न कि किसी सरकार या दल के प्रभाव में आकर काम करे। उन्होंने आरोप लगाया कि देवेंद्र कादियान ने निर्दलीय विधायक बनने के बाद जनता के विश्वास को तोड़ा और सत्ता के साथ खड़े होकर अपने क्षेत्र के लोगों के जनादेश का अपमान किया।
उन्होंने कादियान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो विधायक जनता के भरोसे को तोड़ता है, उसका कोई सिद्धांत या ईमान नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि कादियान पूरी तरह से सत्ता के प्रभाव में काम कर रहे हैं और सरकार के कथित भ्रष्टाचार और गलत नीतियों का समर्थन कर रहे हैं।
अंत में आदित्य देवीलाल ने दावा किया कि जिस तरह से देवेंद्र कादियान ने अपने क्षेत्र की जनता को धोखा दिया है, उसके बाद उनका राजनीतिक भविष्य ज्यादा लंबा नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता उन्हें इसका जवाब जरूर देगी और संभव है कि वे दोबारा विधानसभा तक न पहुंच सकें।
इस पूरे विवाद ने हरियाणा की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। अब देखना होगा कि देवेंद्र कादियान इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह मामला वाकई कानूनी लड़ाई तक पहुंचता है या फिर बयानबाजी तक ही सीमित रहता है

