
‘टटीहरी’ गाने पर विवाद, महिला आयोग के सामने आज बादशाह की पेशी
हरियाणवी गाने ‘टटीहरी’ को लेकर उठे विवाद के बीच मशहूर सिंगर और रैपर Badshah को आज हरियाणा महिला आयोग के सामने पेश होना है। आयोग ने इस मामले की सुनवाई के लिए उन्हें नोटिस भेजकर पानीपत में उपस्थित होने के लिए कहा है। यह सुनवाई शुक्रवार को पानीपत के जिला उपायुक्त कार्यालय में आयोजित की जाएगी, जहां आयोग इस पूरे विवाद पर गायक से जवाब तलब करेगा।

हरियाणा महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि गाने में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर महिलाओं की गरिमा पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग की अध्यक्ष Renuka Bhatiya (रेणू भाटिया) ने कहा है कि यह मुद्दा केवल एक गाने का नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ा हुआ है। इसलिए आयोग इस मामले में पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई करेगा।
सुबह 11:30 बजे तय की गई सुनवाई
महिला आयोग ने इस मामले की सुनवाई 13 मार्च को सुबह 11:30 बजे तय की है। सुनवाई का स्थान पानीपत के जिला उपायुक्त कार्यालय का कॉन्फ्रेंस हॉल रखा गया है। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि वह सुबह 11:30 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहेंगी और इसी दौरान सिंगर बादशाह को पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।
आयोग ने कहा है कि गाने में इस्तेमाल किए गए विवादित शब्दों को लेकर बादशाह को स्पष्ट करना होगा कि उनका वास्तविक अर्थ क्या है। यदि गायक का कहना है कि इन शब्दों का कोई दूसरा सांस्कृतिक या साहित्यिक मतलब है, तो उन्हें आयोग के सामने उसका तर्क और प्रमाण देना होगा।
गाने के शब्दों पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि हरियाणवी अंदाज में बनाए गए इस गीत में कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिन्हें कई लोगों ने महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह गाना हरियाणवी संस्कृति के नाम पर बनाया गया है, लेकिन इसके कुछ बोल समाज की मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।
आयोग की अध्यक्ष रेणू भाटिया ने कहा कि गीत में इस्तेमाल किए गए शब्द महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अभिव्यक्तियां समाज में गलत संदेश देती हैं और इससे महिलाओं की गरिमा प्रभावित होती है।
“महिलाओं की इज्जत पर कीचड़ उछालने जैसा”
रेणू भाटिया ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी कलाकार को अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का इस्तेमाल करे। उन्होंने कहा कि अगर किसी गाने में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है जो माताओं और बेटियों की इज्जत को ठेस पहुंचाते हों, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि आयोग इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पेशी में नहीं आए तो भी होगी कार्रवाई
महिला आयोग ने साफ कर दिया है कि इस मामले में बादशाह की मौजूदगी जरूरी है, लेकिन अगर वे पेश नहीं होते हैं तो भी कार्रवाई रुकने वाली नहीं है। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि कई बार कलाकार या आरोपी नोटिस मिलने के बाद भी पेशी से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
रेणू भाटिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बादशाह पेश नहीं होते हैं तो आयोग उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। इसमें नोटिस जारी करने के अलावा उनका पासपोर्ट जब्त करने और विदेश यात्रा पर रोक लगाने जैसी सिफारिश भी शामिल हो सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायत से शुरू हुआ मामला
यह पूरा विवाद पानीपत के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद सामने आया था। सामाजिक कार्यकर्ता सविता आर्य और Shiv Aarti India Foundation के निदेशक शिव कुमार ने इस गाने को लेकर महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में कहा गया था कि हरियाणवी संस्कृति के नाम पर बनाए गए इस गीत में कुछ शब्द ऐसे हैं जो सामाजिक मर्यादा और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ हैं। शिकायतकर्ताओं ने आयोग से मांग की थी कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए और ऐसे गीतों पर रोक लगाई जाए जो समाज में गलत संदेश फैलाते हैं।
पुलिस प्रशासन को भी दिए गए निर्देश
महिला आयोग ने इस मामले में पुलिस प्रशासन को भी निर्देश दिए हैं। आयोग ने पानीपत के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कहा है कि सुनवाई के दौरान समन में नामजद सभी लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
आयोग का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति सुनवाई में शामिल नहीं होता है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के बाद होगा अगला फैसला
महिला आयोग के अनुसार सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की बात सुनी जाएगी। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और तर्कों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आयोग को लगता है कि गाने के बोल वास्तव में आपत्तिजनक हैं, तो संबंधित कलाकारों और निर्माताओं के खिलाफ सिफारिशें की जा सकती हैं।
फिलहाल इस मामले को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा बनी हुई है। कई लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर समाज की मर्यादा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
आज होने वाली सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस विवाद का आगे क्या रुख होगा और महिला आयोग इस मामले में क्या फैसला लेता है।

