
बैंक घोटाले में 11 आरोपी गिरफ्तार, 100 से ज्यादा खाते फ्रीज
चंडीगढ़ में सामने आए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े बड़े वित्तीय घोटाले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजीलेंस) ने इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी खातों से अवैध तरीके से धनराशि निकालकर उसे कई फर्जी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी ने 100 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

विजीलेंस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान एडीजीपी चारू बाली ने बताया कि इस घोटाले का खुलासा होने के बाद जांच तेजी से की जा रही है। उन्होंने बताया कि 23 फरवरी को पंचकूला स्थित एसवी एंड एसीबी थाने में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच शुरू की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी विभागों के खातों से पैसे ट्रांसफर किए। इन कंपनियों का इस्तेमाल केवल अवैध धन को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए किया जा रहा था। जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं उनमें आर.एस. ट्रेडर्स, कैपको फिंटेक सर्विसेज, एस.आर.आर. प्लानिंग गुरूज प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार इन कंपनियों के माध्यम से सरकारी विभागों के खातों से बड़ी रकम को अलग-अलग खातों में भेजा गया। यह पूरा काम बैंकिंग सिस्टम में हेरफेर करके किया गया था। कई मामलों में बैंक रिकॉर्ड में फर्जी डेबिट मेमो तैयार किए गए, जबकि कुछ लेनदेन बिना किसी वैध दस्तावेज या चेक के ही कर दिए गए।
जांच में अब तक 8 सरकारी विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें से 10 खाते चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में संचालित थे, जबकि 2 खाते एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में थे। इन खातों के माध्यम से संदिग्ध लेनदेन किए गए थे।
मामले की जांच के दौरान विजीलेंस टीम ने कई स्थानों पर छापेमारी भी की। अब तक कुल 16 जगहों पर रेड डाली जा चुकी है। इन छापों के दौरान कई अहम दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े कागजात बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी जुटाई गई है, जिससे जांच में मदद मिलने की उम्मीद है।
जांच एजेंसी ने इस मामले में 100 से अधिक बैंक खातों को डेबिट फ्रीज करने के लिए संबंधित बैंकों को अनुरोध भेजा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन खातों से कोई भी रकम निकाली या ट्रांसफर न की जा सके। अधिकारियों को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल घोटाले की रकम को छिपाने या आगे भेजने के लिए किया जा सकता था।
अब तक इस मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और 1 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका इस घोटाले में अलग-अलग स्तर पर रही है और उनसे पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से 10 को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक आरोपी को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस रिमांड के दौरान उससे पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे घोटाले के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
जांच के दौरान विजीलेंस अधिकारियों ने कई संपत्तियों की भी पहचान की है। करीब 10 ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं जिनके बारे में संदेह है कि उन्हें इस घोटाले से प्राप्त अवैध धन से खरीदा गया है। इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसके अलावा 6 वाहनों को भी जब्त किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि ये वाहन भी घोटाले से कमाए गए पैसे से खरीदे गए हो सकते हैं। इन वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
विजीलेंस टीम ने जांच के दौरान 25 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं। इनमें कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। इन सभी उपकरणों को साइबर फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है ताकि उनमें मौजूद डेटा की जांच की जा सके। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन डिवाइस से घोटाले से जुड़े कई अहम सुराग मिल सकते हैं।
एडीजीपी चारू बाली ने बताया कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन भी लोगों की संलिप्तता इस घोटाले में सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विजीलेंस विभाग का कहना है कि यह मामला काफी बड़ा है और इसमें कई स्तरों पर लोगों की भूमिका हो सकती है। इसलिए जांच को बेहद सावधानी और गहराई से किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस घोटाले के जरिए कुल कितनी रकम का गबन किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

