
भारत पर बढ़ते साइबर हमले: 2025 में 4.7 करोड़ ऑनलाइन खतरे रोके गए, रोजाना 1.3 लाख वेब अटैक का सामना
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। हाल ही में सामने आई साइबर सुरक्षा कंपनी कास्परस्की की रिपोर्ट ने इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान भारत में लगभग 4.7 करोड़ साइबर हमलों को रोकने में सफलता मिली।

यह आंकड़ा बताता है कि इंटरनेट की दुनिया में भारत लगातार साइबर अपराधियों के निशाने पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या और डिजिटल सेवाओं का विस्तार साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। यही वजह है कि देश को हर दिन हजारों साइबर खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
हर दिन हजारों साइबर हमलों का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को रोजाना औसतन करीब 1.3 लाख वेब आधारित साइबर खतरों का सामना करना पड़ता है। ये खतरे अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जिनमें फिशिंग, मालवेयर, संदिग्ध वेबसाइट, वायरस और ऑनलाइन ठगी शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश साइबर हमले इंटरनेट ब्राउजर के माध्यम से किए जाते हैं। जब कोई व्यक्ति असुरक्षित वेबसाइट पर जाता है या किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है, तो हैकर्स उसके सिस्टम में घुसने की कोशिश करते हैं। ऐसे हमलों का उद्देश्य उपयोगकर्ता की निजी जानकारी चुराना या उसके डिवाइस को संक्रमित करना होता है।
2025 में करोड़ों साइबर हमलों को किया गया ब्लॉक
कास्परस्की की रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच उसके सुरक्षा सिस्टम ने भारत में 4 करोड़ 75 लाख से अधिक इंटरनेट आधारित साइबर खतरों को पहचानकर उन्हें ब्लॉक किया।
इस अवधि के दौरान देश के लगभग 24.7 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को किसी न किसी प्रकार के साइबर खतरे का सामना करना पड़ा। इसका अर्थ है कि लगभग हर चौथा इंटरनेट उपयोगकर्ता साइबर अपराधियों के निशाने पर था।
हालांकि सुरक्षा तकनीकों के कारण इन हमलों को काफी हद तक रोका गया, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं और वे पहले से अधिक उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्यूआर कोड के जरिए ठगी के नए तरीके
साइबर अपराधी अब लोगों को फंसाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार हाल के समय में क्यूआर कोड के जरिए होने वाली ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं।
कई बार अपराधी फिशिंग लिंक को छिपाने के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने मोबाइल से उस क्यूआर कोड को स्कैन करता है, तो वह सीधे एक नकली वेबसाइट पर पहुंच जाता है। वहां उससे बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी मांगा जाता है। जैसे ही व्यक्ति यह जानकारी दर्ज करता है, साइबर अपराधी उसके खाते से पैसे निकाल लेते हैं या उसकी पहचान का गलत इस्तेमाल करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
इंटरनेट ब्राउजर बन रहे साइबर हमलों का मुख्य जरिया
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इंटरनेट ब्राउजर साइबर हमलों का सबसे आम माध्यम बने हुए हैं। हैकर्स ब्राउजर और उसके प्लग-इन में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों के कंप्यूटर या मोबाइल सिस्टम में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।
यदि किसी उपयोगकर्ता का ब्राउजर या ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट नहीं है, तो उसके जरिए साइबर अपराधियों के लिए हमला करना आसान हो जाता है। इसलिए विशेषज्ञ नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करने और भरोसेमंद सुरक्षा प्रोग्राम इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
‘फाइललेस मैलवेयर’ बन रहा बड़ा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में फाइललेस मैलवेयर एक गंभीर साइबर खतरे के रूप में सामने आया। यह सामान्य वायरस से अलग होता है क्योंकि यह कंप्यूटर में किसी फाइल के रूप में सेव नहीं होता।
इसके बजाय यह सिस्टम की मेमोरी में छिपकर काम करता है, जिससे इसे पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है। कई बार पारंपरिक एंटीवायरस प्रोग्राम भी इसे पकड़ नहीं पाते।
साइबर अपराधी इस तकनीक का उपयोग करके बिना कोई निशान छोड़े सिस्टम में घुस जाते हैं और संवेदनशील जानकारी चुरा लेते हैं।
भारत में बढ़ रहा साइबर जोखिम
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक है। देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या करोड़ों में है और हर साल इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है।
ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, मोबाइल ऐप्स और सोशल मीडिया के व्यापक उपयोग ने लोगों को डिजिटल दुनिया से जोड़ दिया है। लेकिन यही कारण है कि साइबर अपराधियों के लिए भारत एक बड़ा लक्ष्य बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल विकास के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी है। सरकार और निजी कंपनियां इस दिशा में कई कदम उठा रही हैं, लेकिन उपयोगकर्ताओं की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां
साइबर हमलों से बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं। सबसे पहले मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए।
दूसरा, किसी भी अनजान लिंक, ईमेल या मैसेज पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करनी चाहिए।
तीसरा, केवल भरोसेमंद वेबसाइटों पर ही ऑनलाइन लेनदेन करना चाहिए।
इसके अलावा मोबाइल और कंप्यूटर में सुरक्षा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना और समय-समय पर सिस्टम अपडेट करना भी जरूरी है।
सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ऐसे नेटवर्क पर डेटा चोरी होने का खतरा अधिक होता है।
आने वाले समय में बढ़ सकती है चुनौती
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में साइबर हमलों की संख्या और अधिक बढ़ सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीकों का उपयोग साइबर अपराधी भी करने लगे हैं, जिससे उनके हमले पहले से अधिक जटिल हो सकते हैं।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार, तकनीकी कंपनियों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा, बेहतर तकनीकी सुरक्षा और जागरूक उपयोगकर्ता ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका हैं।
कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि भारत में डिजिटल विकास के साथ-साथ साइबर खतरों का खतरा भी बढ़ रहा है। हालांकि लाखों हमलों को सफलतापूर्वक रोका गया है, लेकिन सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।
