उत्तर प्रदेश

मेरठ में मामूली कहासुनी से मचा बवाल: ऑटो हटाने के विवाद के बाद मारपीट, बुजुर्ग की मौत पर हत्या का आरोप

मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित पठानपुरा गांव में एक साधारण से रास्ते के विवाद ने ऐसा हिंसक मोड़ ले लिया, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। ऑटो निकालने को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने मारपीट का रूप ले लिया। बीच-बचाव करने पहुंचे युवक पर लाठी-डंडों से हमला हुआ और बाद में उसके बुजुर्ग पिता की मौत हो गई। परिजन इसे सुनियोजित हमला और हत्या बता रहे हैं, जबकि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रही है।

घटना बुधवार दोपहर करीब दो बजे की बताई जा रही है। गांव निवासी बिल्लू अपने घर के बाहर खड़ा था। उसी समय वह रास्ते से गुजर रहे एक परिचित वाहन चालक से बातचीत कर रहा था। बातचीत के दौरान कुछ देर के लिए रास्ता आंशिक रूप से घिरा हुआ था। तभी गांव का ही रहने वाला आकाश अपना ऑटो लेकर वहां पहुंचा। उसने रास्ता अवरुद्ध होने पर आपत्ति जताई और बिल्लू से गाड़ी हटाने को कहा।

बताया जाता है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते आवाज ऊंची हो गई और माहौल गरमा गया। शोर-शराबा सुनकर पड़ोस में रहने वाला सतीश मौके पर पहुंचा। सतीश ने दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की और समझाने का प्रयास किया कि बात को बढ़ाने से कोई फायदा नहीं। लेकिन स्थिति संभलने के बजाय और बिगड़ती चली गई।

आरोप है कि बहस के दौरान सतीश और आकाश के बीच भी कहासुनी हो गई। कुछ देर बाद मामला शांत होता दिखाई दिया, लेकिन तनाव बरकरार रहा। परिजनों का कहना है कि थोड़ी देर बाद आकाश अपने साथ छह अन्य लोगों को लेकर दोबारा मौके पर आया। आते ही उन्होंने सतीश को घेर लिया और उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

अचानक हुए हमले से सतीश गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर और शरीर पर चोटें आईं। आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। कुछ लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन हमलावरों का रवैया आक्रामक बताया जा रहा है। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

घायल सतीश को परिजन तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। इसी बीच परिवार को जानकारी मिली कि सतीश के बुजुर्ग पिता ईश्वर दयाल, जो घटना के समय पास ही मौजूद थे, की तबीयत बिगड़ गई है। परिवार का आरोप है कि जब सतीश पर हमला हो रहा था, तब ईश्वर दयाल उसे बचाने के लिए आगे आए थे और धक्का-मुक्की में उन्हें भी चोट लगी। बाद में उनकी हालत अचानक खराब हो गई और उनकी मौत हो गई।

ईश्वर दयाल की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने आकाश और उसके साथियों पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मारपीट के दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग भी किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। परिवार ने सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

हालांकि पुलिस का पक्ष कुछ अलग है। थाना प्रभारी विनय कुमार ने बताया कि प्रारंभिक तहरीर में सतीश पर हमले का जिक्र है, लेकिन ईश्वर दयाल पर सीधे हमले या हत्या का उल्लेख नहीं किया गया था। बाद में जब उनकी मौत की सूचना मिली, तब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग के शरीर पर बाहरी चोट के स्पष्ट निशान नहीं पाए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि ईश्वर दयाल का मेडिकल परीक्षण घटना के तुरंत बाद नहीं कराया गया था। इसलिए मृत्यु का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा। यदि रिपोर्ट में चोट या मारपीट के कारण मृत्यु की पुष्टि होती है, तो धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं। फिलहाल आकाश और छह अज्ञात लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

गांव में घटना के बाद तनावपूर्ण शांति है। एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में पहले भी छोटे-मोटे विवाद होते रहे हैं, लेकिन इस तरह की हिंसक घटना ने सभी को चिंतित कर दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों ने संयम बरता होता, तो एक परिवार को यह दुख नहीं झेलना पड़ता।

सतीश का परिवार इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर बेटा अस्पताल में उपचाराधीन है, तो दूसरी ओर पिता की मौत ने परिवार की कमर तोड़ दी है। परिजनों का कहना है कि वे न्याय की लड़ाई लड़ेंगे और दोषियों को सजा दिलाकर ही दम लेंगे।

कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करेगी। यदि मौत का कारण दिल का दौरा, आंतरिक चोट या सदमे से जुड़ा पाया जाता है, तो पुलिस उसी आधार पर आगे की धाराएं जोड़ेगी। वहीं यदि प्राकृतिक कारण सामने आते हैं, तो मामला केवल मारपीट और जानलेवा हमले तक सीमित रह सकता है।

यह घटना एक बार फिर समाज के सामने यह सवाल खड़ा करती है कि छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता आक्रोश किस तरह जानलेवा साबित हो सकता है। सड़क या रास्ते को लेकर हुए विवाद अक्सर तूल पकड़ लेते हैं, खासकर तब जब दोनों पक्षों में धैर्य की कमी हो। कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति न केवल अपराध को जन्म देती है, बल्कि निर्दोष लोगों को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। आरोपियों की तलाश जारी है और बयान दर्ज किए जा रहे हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि निष्पक्ष जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गांव के लोग अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं, ताकि इस विवाद की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।

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