
मध्य-पूर्व संकट के बीच राहत: इजराइल में काम कर रहे उत्तर प्रदेश के हजारों श्रमिक सुरक्षित, सरकार ने बढ़ाई निगरानी
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने दुनिया भर की सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में विदेशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा बन गई है। इसी संदर्भ में इजराइल में कार्यरत उत्तर प्रदेश के हजारों श्रमिकों को लेकर राहत भरी जानकारी सामने आई है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी श्रमिक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

प्रदेश सरकार के अनुसार इजराइल में लगभग 6000 से अधिक श्रमिक उत्तर प्रदेश के हैं, जो निर्माण परियोजनाओं में कार्यरत हैं। इन श्रमिकों को वर्ष 2024 में भारत सरकार के कौशल कार्यक्रम के तहत चयनित कर भेजा गया था। चयन प्रक्रिया में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, जिसके माध्यम से प्रशिक्षित श्रमिकों को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
इन श्रमिकों को इजराइल भेजने में वहां की सरकारी एजेंसी के साथ औपचारिक समझौता किया गया था, ताकि उन्हें सुरक्षित कार्यस्थल, आवास और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। वर्तमान परिस्थितियों में यही व्यवस्था उनकी सुरक्षा का मजबूत आधार बनी हुई है।
प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर से लेकर केंद्र स्तर तक लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। इजराइल स्थित भारतीय दूतावास तेल अवीव से नियमित संवाद हो रहा है और वहां मौजूद अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। सभी भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि अधिकांश भवनों में सुरक्षा शेल्टर उपलब्ध हैं, जहां आपात स्थिति में लोग सुरक्षित रह सकते हैं। श्रमिकों को अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और समूहों में रहने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही दूतावास की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर किसी भी समय सहायता प्राप्त की जा सकती है।
प्रदेश के श्रम विभाग ने भी विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इजराइल में मौजूद हर श्रमिक की सूची, संपर्क नंबर और कार्यस्थल की जानकारी अपडेट रखी जाए। जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके, इसके लिए समन्वय तंत्र मजबूत किया गया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि श्रमिकों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश में कार्यरत श्रमिक प्रदेश की मेहनत और कौशल का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राज्य के श्रम मंत्री ने भी श्रमिकों के परिवारों को आश्वस्त किया है कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। विभाग लगातार दूतावास, केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं के संपर्क में है। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानांतरण या वापसी की योजना भी तैयार रखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विदेशों में काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल मानवीय जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि कूटनीतिक चुनौती भी है। भारत जैसे बड़े श्रमिक निर्यातक देश के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर सक्रिय रहे।
इजराइल में कुल भारतीय नागरिकों की संख्या लगभग 42 हजार बताई जाती है, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोग शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के श्रमिकों की संख्या इनमें महत्वपूर्ण है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इन सभी श्रमिकों से समय-समय पर संपर्क किया जा रहा है और किसी भी समस्या को तुरंत दर्ज किया जा रहा है।
परिवारों की चिंता को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर भी हेल्पडेस्क बनाए गए हैं। जिन परिवारों के सदस्य इजराइल में हैं, उन्हें समय-समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
वर्तमान हालात भले ही संवेदनशील हों, लेकिन प्रशासनिक तैयारी पूरी है। सरकार का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था, संपर्क प्रणाली और सहायता तंत्र लगातार सक्रिय रहेगा।
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह दिखाता है कि वैश्विक संकटों के समय विदेशों में रह रहे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार, दूतावास और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण होता है। इजराइल में मौजूद उत्तर प्रदेश के श्रमिकों के मामले में यही समन्वय उनकी सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी बना हुआ है।



