
छुट्टी न मिलने का दर्द, बेटी की शादी से पहले पिता ने दी जान
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में शामिल न हो पाने की पीड़ा और ड्यूटी के भारी दबाव से आहत एक शिक्षा मित्र (बीएलओ) ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान 50 वर्षीय अखिलेश सविता के रूप में हुई है, जिनका शव शनिवार शाम बिंदकी क्षेत्र के आलियाबाद गांव स्थित एक प्राथमिक विद्यालय के परिसर में फंदे से लटका मिला। इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और चुनावी ड्यूटी के दबाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि अखिलेश सविता मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में बतौर बीएलओ तैनात थे। इसी व्यस्तता के चलते वह अपनी बेटी दिव्यांशी की आगामी शादी की तैयारियों में पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे। परिवार के मुताबिक, घर में 8 मार्च को होने वाली शादी को लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं और पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन इसी बीच यह दुखद घटना हो गई, जिसने खुशियों को मातम में बदल दिया।
पुलिस के अनुसार, शनिवार शाम ग्रामीणों ने प्राथमिक विद्यालय परिसर में एक व्यक्ति को फंदे से लटका देखा, जिसके बाद तत्काल स्थानीय लोगों और परिजनों को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे परिजन अखिलेश को तुरंत बिंदकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जैसे ही मौत की खबर गांव में फैली, परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर काम के अत्यधिक दबाव और छुट्टी न मिलने की पीड़ा का जिक्र किया है। नोट में उन्होंने लिखा कि वह पिछले कई दिनों से अधिकारियों से छुट्टी की मांग कर रहे थे, ताकि बेटी की शादी की तैयारियों में हाथ बंटा सकें, लेकिन उनकी अर्जी बार-बार खारिज कर दी गई। उन्होंने यह भी लिखा कि लगातार काम और मानसिक तनाव से वह पूरी तरह टूट चुके थे।
परिवार का आरोप है कि अखिलेश सविता पिछले कई हफ्तों से अवकाश के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन चुनाव संबंधी कार्य का हवाला देकर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई। मृतक की पत्नी मंजू देवी और भाई भूपेश कुमार का कहना है कि यदि समय पर छुट्टी मिल जाती, तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। उन्होंने प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने से रोक दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग थी कि मौके पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को बुलाया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया जाए। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब परिजन शव को लेकर वापस गांव चले गए और प्रशासन के खिलाफ विरोध जारी रखा। बाद में पुलिस क्षेत्राधिकारी गौरव शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाने-बुझाने की कोशिश की। काफी मशक्कत और आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकी।
उधर, जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अपर जिलाधिकारी अविनाश त्रिपाठी ने कहा कि सुसाइड नोट की गहन जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी और उसी आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या वाकई छुट्टी न मिलने और प्रशासनिक दबाव ने अखिलेश सविता को यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया, या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था। अधिकारियों का कहना है कि परिजनों के बयान, सुसाइड नोट की लिखावट की पुष्टि और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर चुनावी ड्यूटी और सरकारी कर्मचारियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव की बहस को हवा दे दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव संबंधी कार्यों के दौरान जमीनी स्तर के कर्मचारियों पर अत्यधिक बोझ डाल दिया जाता है, जिससे वे निजी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पिस जाते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए संवेदनशील नीति बनाई जाए और कर्मचारियों को मानवीय आधार पर अवकाश दिया जाए।
फिलहाल, गांव में शोक का माहौल है। जिस घर में कुछ ही दिनों बाद बेटी की डोली उठनी थी, वहां पिता की अर्थी उठने से हर कोई स्तब्ध है। परिजन गहरे सदमे में हैं और पूरे मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कौन है।



