
पंजाब में सड़क हादसों का कहर: मुक्तसर में कार-ई-रिक्शा भिड़ंत में दो की मौत, फगवाड़ा में ट्रक की टक्कर से स्कूटी सवार की जान गई
पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में शुक्रवार देर शाम और रात हुए सड़क हादसों ने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही के खतरों को उजागर कर दिया। श्री मुक्तसर साहिब के मलोट रोड पर हुए दर्दनाक हादसे में कार और ई-रिक्शा की टक्कर से दोनों चालकों की जान चली गई, जबकि कुछ घंटों बाद फगवाड़ा में ट्रक की टक्कर से एक्टिवा सवार की मौके पर ही मौत हो गई। इन घटनाओं ने क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

मलोट रोड पर भीषण टक्कर
मुक्तसर-मलोट हाईवे पर स्थित राधा स्वामी डेरे के पास शुक्रवार देर शाम हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक वरना कार मलोट की ओर से मुक्तसर की तरफ तेज रफ्तार में आ रही थी। उसी दौरान सड़क पर आगे चल रहे ई-रिक्शा से कार की सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहन सड़क से नीचे उतर गए और ई-रिक्शा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि कार की गति काफी अधिक थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। भिड़ंत के बाद जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। ई-रिक्शा के परखच्चे उड़ चुके थे और चालक वाहन में ही फंसा हुआ था।
मौके पर ही ई-रिक्शा चालक की मौत
हादसे में ई-रिक्शा चालक गुरमेल सिंह, जो चक्क बीर सरकार गांव का रहने वाला था, की मौके पर ही मौत हो गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क लंबे समय से हादसों के लिए कुख्यात रही है, लेकिन तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण दुर्घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रहीं।
घायल कार चालक ने अस्पताल में तोड़ा दम
कार चालक बिक्रमजीत सिंह, निवासी गांव धिगाना, गंभीर रूप से घायल हो गया था। राहगीरों ने तुरंत उसे मुक्तसर के सिविल अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए उसे उच्च उपचार के लिए रेफर कर दिया। परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
इस प्रकार इस एक ही हादसे में दो परिवारों के चिराग बुझ गए। गांवों में शोक का माहौल है और परिजन इस घटना को लेकर बेहद व्यथित हैं।
पुलिस जांच में जुटी
मुक्तसर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि दुर्घटना तेज रफ्तार के कारण हुई या सड़क की स्थिति भी जिम्मेदार थी। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि दुर्घटना का सही कारण सामने आ सके।
ध्यान देने वाली बात यह है कि राधा स्वामी डेरे के पास तीन दिनों में यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले मंगलवार को भी ट्राला और पिकअप की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। लगातार हो रहे हादसों से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है और वे प्रशासन से सड़क सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
फगवाड़ा में भी हादसा, स्कूटी सवार की मौत
उधर, फगवाड़ा शहर में भी देर रात एक और सड़क हादसा हुआ। नेशनल हाईवे पर संपूर्ण फीड फैक्टरी के सामने फ्लाईओवर पर एक ट्रक से टकराकर एक्टिवा सवार की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ट्रक ने पीछे से स्कूटी को टक्कर मारी, जिससे चालक सड़क पर गिर गया और गंभीर चोटें आईं।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान फिल्लौर निवासी हिम्मत सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया है और ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी गई है।
बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय
पंजाब में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना, ओवरटेकिंग की होड़ और सड़क नियमों की अनदेखी ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की कमी, संकेतक बोर्डों का अभाव और गलत तरीके से खड़े वाहन भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा देते हैं। कई जगहों पर ई-रिक्शा और धीमी गति वाले वाहनों के लिए अलग लेन न होने से भी जोखिम बढ़ जाता है।
प्रशासन से उठी सख्ती की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्रों में स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं, पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। साथ ही हाईवे पर रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और रोशनी की बेहतर व्यवस्था करने की भी मांग उठ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बल्कि वाहन चालकों की भी नैतिक जिम्मेदारी है। जब तक लोग स्वयं नियमों का पालन नहीं करेंगे, तब तक दुर्घटनाओं में कमी लाना मुश्किल होगा।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इन हादसों में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह क्षति अपूरणीय है। गुरमेल सिंह और बिक्रमजीत सिंह के घरों में मातम पसरा हुआ है। वहीं फगवाड़ा में हिम्मत सिंह के परिजन सदमे में हैं। स्थानीय लोग परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
निष्कर्ष
लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर सामूहिक प्रयास की जरूरत है। प्रशासनिक सतर्कता, तकनीकी उपाय और नागरिक जागरूकता—इन तीनों के बिना हादसों पर अंकुश लगाना संभव नहीं है।
अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो ऐसी घटनाएं आगे भी कई परिवारों को उजाड़ती रहेंगी। सड़क पर निकलते समय सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है—इसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।


