
राजधानी में खुला फर्जी पहचान का खेल: ट्रांसजेंडर बनकर अवैध गतिविधियों में जुटी तीन विदेशी महिलाएं पुलिस के शिकंजे में
राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने अवैध घुसपैठ, पहचान छिपाने की रणनीतियों और संगठित गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर-पश्चिम जिले की दिल्ली पुलिस ने योजनाबद्ध स्टिंग ऑपरेशन के जरिए तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो ट्रांसजेंडर का भेष धारण कर सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से पैसे मांग रही थीं और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पकड़ी गईं। जांच में सामने आया कि तीनों महिलाएं विदेशी नागरिक हैं और अवैध रूप से भारत में रह रही थीं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से जिले की विदेशी निगरानी इकाई सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर सक्रिय संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में जुटी थी। इसी दौरान कुछ महिलाओं की गतिविधियां लगातार संदिग्ध नजर आईं। सूचना मिली कि वे अक्सर आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन के आसपास घूमतीं, राहगीरों से पैसे मांगतीं और कुछ लोगों को अनुचित कामों के लिए उकसाती भी देखी गईं।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले साक्ष्य जुटाने का फैसला किया। निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की एक टीम गठित की गई, जिसने 25 फरवरी को गुप्त स्टिंग ऑपरेशन चलाया। पुलिसकर्मी आम नागरिक और ग्राहक बनकर महिलाओं के संपर्क में पहुंचे। बातचीत के दौरान उन्हें अवैध गतिविधियों के लिए पैसे की पेशकश की गई। जब महिलाओं ने इसमें रुचि दिखाई, तभी टीम ने उन्हें मौके पर ही हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तारी के बाद जब प्रारंभिक पूछताछ की गई तो तीनों महिलाओं ने खुद को भारतीय नागरिक बताया। लेकिन उनके पास मौजूद दस्तावेज, भाषा, व्यवहार और जवाबों में असंगतियां सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने उनके मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। जांच में पता चला कि वे पड़ोसी देश बांग्लादेश की निवासी हैं और भारत में अवैध रूप से प्रवेश कर चुकी हैं।
तीनों की पहचान रोजिना, लैला खानम और मारूफा खातून के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार वे ढाका की रहने वाली हैं। उनके मोबाइल फोन में कई संपर्क नंबर और विदेशी पहचान दस्तावेजों की तस्वीरें मिलीं। फोन में मौजूद डिजिटल पहचान पत्रों से यह पुष्टि हुई कि वे भारतीय नागरिक नहीं हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे संचार एप भी मिले जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय संपर्क बनाए रखने के लिए किया जा रहा था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे करीब छह से सात महीने पहले भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थीं। पश्चिम बंगाल से होते हुए वे दिल्ली पहुंचीं, जहां एक स्थानीय संपर्क की मदद से किराये पर रहने लगीं। पहचान छिपाने के लिए उन्होंने ट्रांसजेंडर का रूप धारण किया ताकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से घुल-मिल सकें और पुलिस की नजर से बच सकें।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका नया नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में पहचान बदलकर अवैध गतिविधियां करने के मामले बढ़े हैं। भीड़भाड़ वाले मेट्रो स्टेशन, बाजार और धार्मिक स्थल ऐसे लोगों के लिए आसान ठिकाना बन जाते हैं, क्योंकि वहां निगरानी के बावजूद पहचान करना मुश्किल होता है। यही वजह है कि राजधानी में सार्वजनिक स्थानों पर गश्त और डिजिटल सर्विलांस दोनों को बढ़ाया गया है।
कार्रवाई के बाद तीनों महिलाओं को कानूनी प्रक्रिया के तहत विदेशी नागरिकों से जुड़े प्राधिकरण के सामने पेश किया गया। उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उनके निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए। फिलहाल उन्हें हिरासत केंद्र भेज दिया गया है और उनके दस्तावेजों की औपचारिक पुष्टि की जा रही है।
पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इन महिलाओं के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें दिल्ली तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या अन्य विदेशी नागरिक भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि कोई नेटवर्क सामने आता है तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
इस घटना ने राजधानी में अवैध प्रवास और पहचान छिपाने के मामलों पर नई बहस छेड़ दी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों में ऐसे मामलों की पहचान करना आसान नहीं होता, क्योंकि बड़ी आबादी और लगातार होने वाले प्रवास के कारण निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में स्थानीय लोगों की सतर्कता और समय पर सूचना बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें और अनजान व्यक्तियों से आर्थिक लेन-देन करते समय सावधानी बरतें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मामला किसी समुदाय विशेष से नहीं बल्कि फर्जी पहचान और अवैध गतिविधियों से जुड़ा है। इसलिए किसी भी वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह से बचना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार राजधानी में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा। सीमा पार से अवैध प्रवेश, फर्जी पहचान और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि तकनीक, खुफिया जानकारी और नागरिक सहयोग के संयोजन से ही ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
यह कार्रवाई राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। पुलिस का मानना है कि लगातार निगरानी और सटीक कार्रवाई से न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा बल्कि लोगों में भी सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा।



