
हापुड़ में दरिंदगी, मौलाना पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के सिखेड़ा गांव में एक मौलाना पर पड़ोस में रहने वाली 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का खुलासा तब हुआ जब नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच तेज कर दी है।

जानकारी के अनुसार सिखेड़ा गांव में मौलाना इस्लाम पुत्र मकसूद अपने परिवार के साथ रहता था। उसके पड़ोस में अमरोहा जिले का एक मजदूर परिवार किराये पर रहकर मेहनत-मजदूरी करता है। आरोप है कि मौलाना ने पड़ोस की 14 साल की बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बच्ची को इतना डरा-धमका दिया कि वह लंबे समय तक इस घटना की जानकारी अपने परिवार को नहीं दे सकी।
परिवार का आरोप है कि मौलाना ने बच्ची की मजबूरी का फायदा उठाते हुए कई बार उसके साथ गलत काम किया। डर और सामाजिक बदनामी के भय से नाबालिग चुप रही। इसी दौरान वह गर्भवती हो गई, लेकिन घरवालों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बताया गया है कि चार दिन पहले बच्ची के पेट में तेज दर्द शुरू हुआ। 14 फरवरी की शाम को उसने घर पर ही एक बच्ची को जन्म दे दिया। जब परिवार को इस बात का पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों के पूछने पर नाबालिग ने रोते हुए पूरी आपबीती सुनाई और मौलाना पर गंभीर आरोप लगाए।
घटना की जानकारी मिलते ही परिवार ने पिलखुवा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी मौलाना इस्लाम के खिलाफ नाबालिग से दुष्कर्म समेत पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोग आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं पीड़िता और उसका परिवार गहरे सदमे में है। प्रशासन की ओर से बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसकी काउंसलिंग भी कराई जा रही है ताकि वह मानसिक रूप से संभल सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपी को कानून के तहत कड़ी सजा दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर समाज में नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ की जानकारी देना और परिवारों का सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।



