
चुनाव में रोमांचक मुकाबला, अनुज शर्मा अध्यक्ष और परवेज आलम महामंत्री निर्वाचित
मेरठ बार एसोसिएशन के प्रबंध समिति चुनाव में इस बार का मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे का रहा। देर रात तक चली मतगणना के बाद अध्यक्ष पद पर अनुज कुमार शर्मा और महामंत्री पद पर परवेज आलम ने जीत दर्ज की। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अधिवक्ताओं के बीच इस बार सीधी टक्कर रही और हर वोट की अहमियत महसूस की गई।

बुधवार को सुबह से शुरू हुई मतगणना देर रात तक जारी रही। कुल 3246 मतपत्रों को 65 बंडलों में विभाजित कर दो अलग-अलग टेबलों पर गिनती की गई। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए पूरी व्यवस्था सख्त निगरानी में की गई थी। पहली मंजिल पर स्थित पुस्तकालय कक्ष में चुनाव अधिकारी वीरेंद्र सिंह सिरोही की देखरेख में मतगणना कराई गई, जबकि नीचे स्थित हाल में नेपाल सिंह सोम ने प्रक्रिया पूरी कराई।
मतगणना पंडित नानकचंद सभागार में संपन्न हुई। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की उत्सुकता को देखते हुए सभागार के बाहर परिसर में दो बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गईं, जिन पर राउंड दर राउंड परिणामों की जानकारी प्रदर्शित की जाती रही। जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ते गए, समर्थकों की धड़कनें तेज होती गईं। कई पदों पर मुकाबला बेहद नजदीकी रहा, जिससे अंतिम परिणाम तक सस्पेंस बना रहा।
अध्यक्ष पद पर करीबी मुकाबला
अध्यक्ष पद पर अनुज कुमार शर्मा और विजय त्यागी के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। 65 राउंड की मतगणना के बाद अनुज शर्मा ने कुल 1618 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी विजय त्यागी को 1564 मत मिले। इस तरह मात्र 54 वोटों के अंतर से अनुज शर्मा ने जीत हासिल की। यह अंतर बताता है कि चुनाव में हर वोट निर्णायक साबित हुआ।
महामंत्री पद पर 15 वोटों का अंतर
महामंत्री पद का परिणाम और भी रोमांचक रहा। परवेज आलम और सचिन कुमार नरेश के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। अंततः परवेज आलम ने 1596 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि सचिन कुमार नरेश को 1581 मत मिले। दोनों के बीच केवल 15 वोटों का अंतर रहा। इस नतीजे ने चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया।
अन्य प्रमुख पदों के परिणाम
वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर नरेश कुमार ने 1618 मतों के साथ प्रभावशाली जीत दर्ज की। उन्होंने पंकज जैन को 200 वोटों के अंतर से हराया। पंकज जैन को 1418 मत मिले।
कोषाध्यक्ष पद पर विकास रावत ने 1647 मत प्राप्त कर जीत हासिल की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी शिवम (गुप्ता) को 254 वोटों से पराजित किया, जिन्हें 1393 मत मिले।
उपाध्यक्ष पद पर संजय यादव 1445 मत प्राप्त कर विजयी रहे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी क्षितिज भारद्वाज को 1414 मत मिले।
संयुक्त सचिव (प्रशासन) पद पर ध्रुव झा ने 1725 मत प्राप्त कर रविश भारद्वाज को 351 वोटों के अंतर से हराया।
संयुक्त सचिव (पुस्तकालय) पद पर चेतना गोस्वामी ने 1879 मतों के साथ बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने उमेश पूनिया को 599 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया।
संयुक्त सचिव (प्रकाशन) पद पर संजीव कुमार 1554 मत लेकर विजयी हुए, जबकि अरुण कुमार अग्रवाल को 1462 मत मिले।
चुनाव अधिकारियों की सक्रिय भूमिका
पूरी चुनाव प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने में मंडल चुनाव अधिकारी रऊफ उल हसन अंसारी, जगदीश गिरी, नेपाल सिंह सोम, अशोक पंडित, विरेंद्र सिंह सिरोही, मनोज गुप्ता, सतेंद्र सिंह, मनुज बुटार और सहदेव सिंह सोम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कुल 65 राउंड की मतगणना शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से पूरी कराई गई।
निर्वाचित अध्यक्ष का विजन
जीत के बाद अनुज शर्मा ने इसे अधिवक्ताओं की सामूहिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए ठोस पहल की जाए। साथ ही युवा अधिवक्ताओं के लिए चेंबर की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बार और बेंच के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने का संकल्प भी दोहराया।
महामंत्री की प्राथमिकताएं
नवनिर्वाचित महामंत्री परवेज आलम ने अपनी जीत को सर्वसमाज के अधिवक्ताओं का समर्थन बताया। उन्होंने कहा कि युवा और महिला अधिवक्ताओं की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा। नए चेंबर निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा पुस्तकालय को वाईफाई सुविधा से लैस कर डिजिटल रूप में विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई।
विजेताओं का स्वागत
परिणाम घोषित होते ही समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। विजयी प्रत्याशियों का माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। विभिन्न वरिष्ठ अधिवक्ताओं और पदाधिकारियों ने नव निर्वाचित टीम को बधाई दी और उनके कार्यकाल के सफल होने की कामना की। पूरे परिसर में जश्न का माहौल रहा और समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।
इस चुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया कि मेरठ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता अपने नेतृत्व को लेकर सजग और सक्रिय हैं। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सामने अब अधिवक्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती है। बार और बेंच के बेहतर तालमेल, अधिवक्ताओं की सुविधाओं में सुधार और संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।



