
सस्ते सौदों के जाल में फंसाकर देशभर में ठगी, मेरठ से चार गिरफ्तार
मेरठ। ऑनलाइन सस्ते सामान का लालच देकर लोगों से ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का मुंडाली थाना और साइबर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोप है कि ये लोग फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट बनाकर देशभर के लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और डिजिटल पेमेंट के जरिए रकम ऐंठकर गायब हो जाते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुंडाली क्षेत्र निवासी सलमान, सलीम, मतलूब और जीशान के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से कई कंपनियों के नौ मोबाइल फोन, लोहे और कांच के झूमर, कांच की सजावटी बॉल, लकड़ी के फूल और अन्य डेकोरेशन का सामान बरामद किया है। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई राज्यों में लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे ने बताया कि साइबर पुलिस को कुछ दिन पहले शिकायतों के माध्यम से इस गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी सोशल मीडिया पर अलग-अलग नामों से फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। इन प्रोफाइल पर वे महंगे घरेलू सजावटी सामान, झूमर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम और अन्य उत्पादों की आकर्षक तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करते थे। यह तस्वीरें और वीडियो वे अन्य असली ऑनलाइन पेजों से डाउनलोड कर लेते थे और अपने मोबाइल नंबर के साथ दोबारा अपलोड कर देते थे, ताकि लोग उन्हें असली विक्रेता समझ लें।
जैसे ही कोई ग्राहक सस्ते दाम देखकर संपर्क करता, आरोपी उसे व्हाट्सएप पर उत्पाद की अतिरिक्त तस्वीरें और जानकारी भेजते थे। बातचीत के दौरान वे भरोसा दिलाने के लिए मीठी भाषा का इस्तेमाल करते और सीमित समय की ऑफर जैसी बातें कहकर ग्राहक पर जल्द भुगतान करने का दबाव बनाते थे। भुगतान के लिए वे गूगल पे और फोन पे जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते थे। ग्राहक जैसे ही रकम ट्रांसफर करता, आरोपी या तो उसे ब्लॉक कर देते या फिर बहाने बनाकर टालते रहते। अंततः न तो सामान भेजा जाता और न ही पैसे लौटाए जाते।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने अपने नेटवर्क को केवल मेरठ या आसपास तक सीमित नहीं रखा था। डिजिटल माध्यम का फायदा उठाकर उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कई पीड़ितों ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर साइबर सेल ने तकनीकी सर्विलांस शुरू किया। मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की पड़ताल के बाद आरोपियों की लोकेशन का पता चला।
रविवार को साइबर पुलिस ने स्थानीय मुंडाली थाना पुलिस के सहयोग से घेराबंदी कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस टीम ने मौके से कई मोबाइल फोन और सजावटी सामान बरामद किया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लगातार नए सिम कार्ड और अलग-अलग डिवाइस का उपयोग करते थे, ताकि उनकी पहचान ट्रेस न हो सके। हालांकि साइबर टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनके पूरे नेटवर्क को खंगाल लिया।
एसएसपी अविनाश पांडे ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। साथ ही पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य तो इसमें शामिल नहीं हैं और अब तक कितनी रकम की ठगी की जा चुकी है। बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी करते समय लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल अधिकृत और भरोसेमंद वेबसाइट या सत्यापित पेज से ही सामान खरीदें। किसी भी अनजान प्रोफाइल पर दिख रहे अत्यधिक सस्ते ऑफर से सतर्क रहें। भुगतान करने से पहले विक्रेता की पहचान और रिव्यू जरूर जांच लें। अगर कोई व्यक्ति केवल एडवांस भुगतान लेकर माल भेजने की बात कहे और कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प न दे, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
साइबर विशेषज्ञों का भी मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बढ़ते ऑनलाइन व्यापार के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। ठग लोगों की लालच और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी लिंक पर क्लिक करने, निजी जानकारी साझा करने या भुगतान करने से पहले पूरी तरह सत्यापन करना जरूरी है।
मेरठ पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि वे इस तरह की किसी ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी थाने में सूचना दें। समय पर शिकायत करने से ठगों तक पहुंचना आसान हो जाता है और रकम वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
फिलहाल चारों आरोपी सलाखों के पीछे हैं और पुलिस उनसे पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी है। उम्मीद है कि इस कार्रवाई से ऑनलाइन ठगी के मामलों पर कुछ हद तक अंकुश लगेगा और लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी।



