
महाशिवरात्रि पर शिवमय हुई अयोध्या: नागेश्वर नाथ मंदिर से निकलेगी अलौकिक शिव बारात, भक्तों में उमड़ा आस्था का सैलाब
पावन सरयू तट पर बसी आस्था की नगरी अयोध्या इन दिनों महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पूरी तरह भक्तिरस में डूबी हुई है। सामान्यतः भगवान राम की भक्ति के लिए विख्यात यह नगर अब शिव आराधना के रंग में रंगा दिखाई दे रहा है। मंदिरों में घंटे-घड़ियाल की ध्वनि, मंत्रोच्चार, भजन और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा है। श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है और पूरा शहर एक विशाल धार्मिक उत्सव का रूप ले चुका है।

विशेष रूप से प्राचीन नागेश्वर नाथ मंदिर इस उत्सव का केंद्र बना हुआ है। यहां शनिवार को भगवान शिव के विवाह से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठान पूरे किए गए। विधि-विधान से हल्दी की रस्म संपन्न हुई, जिसमें पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ पूजन कराया। श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बने और मंदिर परिसर “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि पर रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। अनुमान है कि पांच लाख से अधिक भक्त अयोध्या में दर्शन और पूजन के लिए पहुंच सकते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और यातायात प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और मंदिरों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, साथ ही सीसीटीवी निगरानी भी बढ़ाई गई है।
रविवार को इस आयोजन का सबसे आकर्षक दृश्य देखने को मिलेगा, जब मंदिर से भगवान शिव की भव्य बारात निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम होगी। बारात में रथों पर सुसज्जित शिव-पार्वती के स्वरूप, झांकियां, नृत्य दल, बैंड-बाजे और साधु-संत शामिल होंगे। हजारों श्रद्धालु इस बारात में शामिल होकर भोलेनाथ के विवाह उत्सव के साक्षी बनेंगे।
यह शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए अंततः क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां परंपरागत रूप से बारात का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद रात में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का आयोजन किया जाएगा। यह विवाह वैदिक मंत्रों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होगा, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु देर रात तक मंदिर परिसर में मौजूद रहेंगे।
महाशिवरात्रि के अवसर पर केवल प्रमुख मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरे शहर के शिवालयों को विशेष रूप से सजाया गया है। फूलों, रोशनी और रंगीन सजावट से मंदिरों की भव्यता और बढ़ गई है। भक्त सुबह से ही जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं। अनेक श्रद्धालु व्रत रखकर दिनभर उपासना कर रहे हैं और रात्रि में रुद्राभिषेक करने की तैयारी में हैं।
आस्था का एक और प्रमुख केंद्र राम की पैड़ी भी श्रद्धालुओं से गुलजार है। यहां भक्त पवित्र स्नान कर मंदिरों में दर्शन के लिए जा रहे हैं। घाटों पर दीपों की रोशनी और भक्ति संगीत का वातावरण इस पर्व की गरिमा को और बढ़ा रहा है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि विशेष शुभ योगों में मनाई जा रही है, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन रात्रि में चारों प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूध, शहद, गंगाजल और धतूरा चढ़ा रहे हैं।
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि रविवार शाम से आरंभ होकर अगले दिन तक रहेगी। परंपरा के अनुसार शिवरात्रि का मुख्य पूजन रात्रि में किया जाता है, इसलिए मंदिरों में पूरी रात जागरण, भजन और आरती का क्रम चलेगा। कई स्थानों पर भंडारे और प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है।
इस पर्व का प्रभाव शहर की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। बाजारों में पूजा सामग्री, फूल-माला और प्रसाद की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। होटल, धर्मशाला और लाज भी श्रद्धालुओं से भरे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि महाशिवरात्रि अयोध्या में केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और परंपरा का प्रतीक बन गया है।
कुल मिलाकर, इस बार की महाशिवरात्रि अयोध्या में श्रद्धा, उत्साह और परंपरा का अद्वितीय संगम लेकर आई है। शिव बारात, विवाह उत्सव और रात्रि भर चलने वाले पूजन कार्यक्रमों के बीच पूरी नगरी शिवमय हो उठी है। भक्तों के चेहरे पर आस्था की चमक और मंदिरों में गूंजते जयघोष इस पर्व को और भी भव्य बना रहे हैं।



