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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: एसबीआई रिपोर्ट में 90 अरब डॉलर से अधिक अधिशेष की संभावना, अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा संबल

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता आर्थिक रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ताजा विश्लेषण रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि टैरिफ में संभावित कटौती और बाजार पहुंच के विस्तार से भारत का अमेरिका के साथ वार्षिक व्यापार अधिशेष 90 अरब डॉलर के पार जा सकता है। यह मौजूदा स्तर से दोगुनी से अधिक वृद्धि होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत प्रोत्साहन का काम कर सकती है।

मौजूदा स्थिति और संभावित उछाल

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष 40.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, यदि दोनों देशों के बीच टैरिफ कम होते हैं और व्यापारिक बाधाएं घटती हैं, तो यह अधिशेष आने वाले समय में 90 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। 2025-26 के पहले नौ महीनों में ही 26 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज होना इस संभावना को और मजबूत करता है।

एसबीआई का आकलन है कि भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले शीर्ष 15 उत्पादों में लगभग 97 अरब डॉलर तक अतिरिक्त निर्यात की क्षमता मौजूद है। यदि अन्य उत्पादों को भी जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 100 अरब डॉलर से आगे जा सकता है। इसका सीधा फायदा विनिर्माण, एमएसएमई सेक्टर और निर्यात उन्मुख उद्योगों को मिलेगा।

टैरिफ कटौती से खुलेंगे नए अवसर

व्यापार समझौते के तहत कई भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी आयात शुल्क में कमी की उम्मीद है। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट्स और आईटी सेवाएं ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत पहले से मजबूत स्थिति में है और शुल्क में राहत मिलने पर तेजी से विस्तार कर सकता है।

रिपोर्ट का मानना है कि टैरिफ में कमी से न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका भी सुदृढ़ होगी। इससे विदेशी निवेश आकर्षित होने और रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।

अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत बड़ा अवसर

एसबीआई की रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए एक विशाल संभावित बाजार है। वर्तमान में भारत के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 7 फीसदी है, जबकि सेवाओं के आयात में यह 15 फीसदी तक है। इसका अर्थ है कि अमेरिकी कंपनियों के पास भारत में विस्तार के व्यापक अवसर हैं।

सेवाओं को छोड़कर अमेरिका भारत को हर साल 50 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात कर सकता है। औद्योगिक मशीनरी, कृषि उत्पाद, ऊर्जा उपकरण और उच्च तकनीक वाले सामान ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अमेरिका की मजबूत पकड़ है।

आयात में वृद्धि, लेकिन संतुलित लाभ

व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने या समाप्त करने की सहमति जताई है। इससे अमेरिका से आयात में करीब 55 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी संभव है। हालांकि आयात बढ़ने से प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी, लेकिन निर्यात में संभावित तेज वृद्धि के कारण व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में रहने की उम्मीद है।

कुछ उत्पादों में अमेरिका पहले से ही प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। उदाहरण के लिए, बादाम के मामले में भारत के कुल आयात का लगभग 90 फीसदी हिस्सा अमेरिका से आता है। टैरिफ कम होने से इन उत्पादों की कीमतों में कमी आ सकती है और उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में संभावित बचत

रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर व्यापार शर्तों और शुल्क में कमी से भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार में करीब तीन अरब डॉलर तक की बचत कर सकता है। सिर्फ बादाम आयात में ही 10 से 15 करोड़ डॉलर की संभावित बचत का अनुमान है। यदि आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा दिया जाए और घरेलू उत्पादन मजबूत किया जाए, तो यह बचत और भी अधिक हो सकती है।

जीडीपी और रोजगार पर असर

व्यापार अधिशेष में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव देश की जीडीपी पर पड़ सकता है। अनुमान है कि यदि अधिशेष 90 अरब डॉलर से अधिक पहुंचता है, तो इससे जीडीपी में करीब 1.1 प्रतिशत तक का अतिरिक्त योगदान मिल सकता है। निर्यात बढ़ने से विनिर्माण इकाइयों में उत्पादन तेज होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को भी गति दे सकता है। निर्यात आधारित विकास मॉडल से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी।

दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी

दोनों देशों के बीच अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के सामानों और सेवाओं के आदान-प्रदान का लक्ष्य रखा गया है। यदि यह लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल होता है, तो भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि संभावनाएं उत्साहजनक हैं, लेकिन घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा बनाए रखना भी अहम होगा। आयात में वृद्धि से कुछ क्षेत्रों पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए नीति निर्धारण में संतुलन और चरणबद्ध कार्यान्वयन जरूरी रहेगा।

निष्कर्ष

एसबीआई की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर लेकर आ सकता है। 90 अरब डॉलर से अधिक व्यापार अधिशेष, 100 अरब डॉलर तक अतिरिक्त निर्यात की संभावना और विदेशी मुद्रा में बचत—ये सभी संकेत भारत की आर्थिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। यदि रणनीतिक योजना और संतुलित नीति अपनाई जाए, तो यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकती है।

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