
एक झपकी बनी काल, गाजीपुर टोल के पास दर्दनाक हादसे में मां-बेटी की मौत
दिल्ली की सीमा में दाखिल होते ही एक परिवार पर ऐसा कहर टूटा, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। गाजीपुर टोल टैक्स के पास तड़के सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में मां और बेटी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कार चला रहे दीपांशु को पूरी रात ड्राइविंग के बाद झपकी आ गई थी, जिससे कार अनियंत्रित होकर कंटेनर से जा भिड़ी।

खुशियों से मातम तक का सफर
यह सफर दरअसल खुशियों के लिए शुरू हुआ था। खारी बावली के नया बाजार में चावल के बड़े कारोबारी राजेंद्र गर्ग के बेटे दीपांशु ने होली और अपनी शादी की सालगिरह के मौके पर बहन दीपांजलि को दिल्ली बुलाया था। दीपांजलि की शादी करीब छह साल पहले देहरादून निवासी अंशुल गुप्ता से हुई थी, जो प्रॉपर्टी का कारोबार करते हैं। वह अपने परिवार के साथ क्लेमेंट टाउन इलाके में रहती थीं।
बुधवार रात करीब नौ बजे दीपांशु अपनी मां नीलम गर्ग के साथ रोहिणी से देहरादून के लिए रवाना हुआ। देर रात करीब डेढ़ बजे वह बहन के घर पहुंचा। वहां थोड़ी देर रुककर खाना खाने के बाद रात लगभग ढाई बजे वह बहन और उसके दोनों बच्चों को लेकर दिल्ली के लिए निकल पड़ा। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर आखिरी साबित होगा।
थकान बनी हादसे की वजह?
दीपांशु ने लगातार पूरी रात कार चलाई थी। परिवार के लोगों का कहना है कि वह थका हुआ था, लेकिन घर जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी में उसने आराम नहीं किया। सुबह जब कार दिल्ली की सीमा में दाखिल हुई, तभी हादसा हो गया। पुलिस के अनुसार, सुबह 6:43 बजे हादसे की सूचना मिली।

जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि टोल टैक्स पर तीन लेन खाली थीं। बावजूद इसके कार उस लेन में जा घुसी, जहां एक कंटेनर ट्रक खड़ा था। यह सवाल जांच का विषय है कि आखिर खाली लेन छोड़कर कार कंटेनर से क्यों टकराई। क्या यह महज झपकी का परिणाम था या फिर किसी अन्य वजह से वाहन नियंत्रण से बाहर हुआ—पुलिस हर पहलू की पड़ताल कर रही है।
बायीं ओर से टक्कर, मां-बेटी की मौके पर मौत
कार में बैठने की व्यवस्था भी हादसे की भयावहता को समझाती है। दीपांजलि बायीं ओर आगे की सीट पर बैठी थीं, जबकि उनकी मां नीलम गर्ग ठीक पीछे वाली सीट पर थीं। कार चला रहे दीपांशु के पीछे दोनों बच्चे बैठे थे। टक्कर कार की बायीं ओर से हुई, जिससे सबसे ज्यादा चोट उसी हिस्से में बैठी मां-बेटी को लगी और दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
दीपांशु और दोनों बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि दीपांशु और छोटे वाशु की हालत नाजुक बनी हुई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
मासूम की पुकार ने सबको रुलाया
हादसे के बाद का दृश्य बेहद मार्मिक था। पांच साल का विवान घायल अवस्था में बार-बार अपनी मां को पुकार रहा था। उसे शायद यह एहसास नहीं था कि उसकी मां अब कभी जवाब नहीं दे पाएगी। परिवार के लोग और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे।
जाम और अफरातफरी
हादसे के कारण एनएच-9 और दिल्ली-मेरठ हाईवे पर लंबा जाम लग गया। कार टक्कर के बाद सड़क पर घूमकर अटक गई थी। पुलिस को शवों और क्षतिग्रस्त वाहन को हटाने में समय लगा। करीब एक घंटे तक ट्रैफिक पूरी तरह ठप रहा। तमाशबीनों की भीड़ ने भी स्थिति को और बिगाड़ दिया। बाद में दिल्ली और यूपी पुलिस ने मिलकर ट्रैफिक डायवर्ट कराया और क्रेन की मदद से वाहन हटवाया, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। दीपांजलि के पति अंशुल गुप्ता तुरंत देहरादून से दिल्ली के लिए रवाना हुए। वहीं दीपांशु के पिता राजेंद्र गर्ग, जो बीमार रहते हैं, उन्हें फिलहाल पत्नी और बेटी की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। परिजनों ने उनकी सेहत को देखते हुए यह फैसला लिया।
इस महीने दीपांशु की शादी की सालगिरह भी थी। जो समय परिवार के साथ जश्न मनाने का था, वह अब मातम में बदल चुका है। एक छोटी सी लापरवाही या थकान ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर लंबी दूरी की ड्राइविंग के दौरान सावधानी की जरूरत को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कई घंटों तक वाहन चलाने से प्रतिक्रिया क्षमता कम हो जाती है। एक पल की झपकी भी जानलेवा साबित हो सकती है। खासकर हाईवे पर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की मौजूदगी जोखिम को और बढ़ा देती है।
पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। कंटेनर चालक से भी पूछताछ की जा रही है। हालांकि शुरुआती संकेत थकान और झपकी की ओर इशारा करते हैं।
एक सबक छोड़ गया हादसा
गाजीपुर टोल के पास हुआ यह दर्दनाक हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही का गंभीर परिणाम भी है। एक छोटी सी झपकी ने दो जिंदगियां छीन लीं और बाकी सदस्यों को जिंदगी भर का घाव दे दिया।
अब सवाल यह है कि क्या हम ऐसे हादसों से सबक लेंगे? लंबी ड्राइव से पहले पर्याप्त आराम, बीच-बीच में ब्रेक और सतर्कता ही ऐसे हादसों को रोक सकती है। लेकिन जब तक सावधानी आदत नहीं बनेगी, तब तक सड़कें यूं ही परिवारों को उजाड़ती रहेंगी।



