
एक और बुजुर्ग की जान गई: हाईवे पर लापरवाही ने छीना परिवार का सहारा
बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग पर रविवार को हुआ एक सड़क हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार की दुनिया उजड़ने की कहानी बन गया। भड़ल पुलिस चौकी के पास गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से घायल हुए 75 वर्षीय वेदप्रकाश की देर रात अस्पताल में मौत हो गई। उनकी मौत ने न केवल परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि क्षेत्र की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सहारनपुर जिले के गंगोह निवासी वेदप्रकाश रविवार को अपनी स्कूटी से बड़ौत की ओर जा रहे थे। उम्र भले ही 75 साल थी, लेकिन वे आत्मनिर्भर जीवन जीते थे और अपने काम खुद निपटाते थे। परिवार के अनुसार, वे एक जरूरी काम से निकले थे और शाम तक लौटने की उम्मीद थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उनका आखिरी सफर साबित होगा।
जैसे ही वे भड़ल पुलिस चौकी के समीप पहुंचे, अचानक गन्ने से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रैक्टर-ट्रॉली तेज रफ्तार में थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वेदप्रकाश सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
मौके पर मौजूद किसान अमित ने मानवता का परिचय देते हुए घायल बुजुर्ग को तुरंत बुढ़ाना के एक अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर हालत में भर्ती किया। कई घंटे तक इलाज चला, लेकिन सिर और शरीर पर आई गंभीर चोटों के कारण वे जिंदगी की जंग हार गए। रविवार देर रात अस्पताल से उनकी मौत की खबर आई तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिजनों के मुताबिक, वेदप्रकाश परिवार के बुजुर्ग और मार्गदर्शक थे। उनका अनुभव और स्नेह पूरे घर को जोड़कर रखता था। उनकी असमय मृत्यु से घर में सन्नाटा छा गया है। रिश्तेदारों और गांव वालों का तांता लग गया। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था — आखिर कब तक सड़क पर लापरवाही यूं ही जान लेती रहेगी?
हादसे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक मौके से चला गया। हालांकि इस मामले में परिजनों ने कोई लिखित शिकायत पुलिस को नहीं दी और अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या भय, झंझट या सामाजिक दबाव के कारण कई मामले कानूनी कार्रवाई तक नहीं पहुंच पाते?
जांच अधिकारी सूर्यदीप सिंह ने बताया कि यदि तहरीर मिलती है तो प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार आम बात है। गन्ने के सीजन में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ओवरलोड होकर गुजरती हैं, जिन पर न तो पर्याप्त रिफ्लेक्टर लगे होते हैं और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है।
भड़ल पुलिस चौकी के आसपास पहले भी छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो स्पीड कंट्रोल के ठोस इंतजाम किए गए और न ही नियमित चेकिंग अभियान चलाए गए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं और ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो।
सड़क हादसे अक्सर खबर बनते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद भुला दिए जाते हैं। मगर जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए यह दर्द जिंदगी भर का होता है। वेदप्रकाश की मौत भी आंकड़ों में दर्ज एक संख्या बनकर न रह जाए, इसके लिए जरूरी है कि जिम्मेदार विभाग ठोस कदम उठाएं।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है — प्रशासन के लिए भी और वाहन चालकों के लिए भी। अगर समय रहते सख्ती और जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो ऐसी घटनाएं यूं ही मासूम जिंदगियां छीनती रहेंगी।
वेदप्रकाश अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर एक नई बहस जरूर छोड़ गई है। सवाल अब भी वही है — क्या अगला हादसा होने से पहले कुछ बदलेगा?



