
मेरठ में नाम बदलने को लेकर बवाल, गुर्जर चौक पर लगा ‘आंबेडकर चौक’ का बोर्ड हटाया गया
मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में स्थित गुर्जर चौक पर शनिवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब एक युवक ने चौक पर नया बोर्ड लगाकर उसका नाम “आंबेडकर चौक” लिख दिया। यह मामला कुछ ही देर में चर्चा का विषय बन गया और स्थानीय लोगों के विरोध के चलते मौके पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह के समय एक युवक चौक पर पहुंचा और वहां पहले से लगे नाम के स्थान पर नया बोर्ड लगा दिया। बोर्ड पर “आंबेडकर चौक” लिखा हुआ था। आसपास मौजूद लोगों ने जब यह देखा तो उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि चौक का नाम वर्षों से गुर्जर चौक है और बिना किसी आधिकारिक घोषणा या प्रशासनिक अनुमति के इसे बदला नहीं जा सकता।
धीरे-धीरे वहां लोगों की भीड़ जमा होने लगी। कुछ लोग नाम बदलने के पक्ष में भी नजर आए, लेकिन अधिकांश स्थानीय नागरिकों ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए आपत्ति जताई। देखते ही देखते बहस का माहौल बन गया और स्थिति बिगड़ने की आशंका बढ़ गई।
मामले की सूचना मिलते ही लिसाड़ी गेट थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने पहले दोनों पक्षों से बातचीत कर हालात को समझने की कोशिश की। अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि किसी भी सार्वजनिक स्थल का नाम बदलने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसे संबंधित प्रशासनिक विभागों से मंजूरी के बाद ही लागू किया जा सकता है। बिना अनुमति इस तरह का बोर्ड लगाना नियमों के खिलाफ है।
पुलिस ने एहतियातन नए लगाए गए बोर्ड को हटवा दिया, ताकि किसी भी प्रकार का विवाद आगे न बढ़े। इसके बाद लोगों को शांत कर वहां से हटाया गया। कुछ समय तक पुलिस बल मौके पर तैनात रहा, ताकि दोबारा कोई तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि इस संबंध में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई तहरीर मिलती है तो जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और क्षेत्र में शांति बनी हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन सभी समुदायों और वर्गों की भावनाओं का सम्मान करता है, लेकिन कानून और व्यवस्था बनाए रखना सर्वोपरि है। किसी भी प्रकार का बदलाव या नामकरण संबंधित नियमों के तहत ही किया जाना चाहिए।
घटना के बाद इलाके में दिनभर चर्चा का माहौल रहा। कई लोग इस बात पर जोर देते दिखे कि डॉ. भीमराव आंबेडकर देश के महान नेता और संविधान निर्माता थे, जिनके नाम पर कई स्थानों का नामकरण हुआ है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना था कि किसी भी स्थान की पहचान से छेड़छाड़ करने से पहले प्रशासनिक अनुमति और स्थानीय सहमति आवश्यक है।
फिलहाल पुलिस ने स्थिति को सामान्य बताया है और कहा है कि अगर भविष्य में कोई शिकायत सामने आती है तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सार्वजनिक स्थलों के नाम से जुड़ी भावनाएं कितनी संवेदनशील हो सकती हैं और किसी भी निर्णय से पहले नियमानुसार प्रक्रिया अपनाना कितना जरूरी है।



