
चेतावनी: बच्चों में लगातार दस्त दिखें तो हो जाएं सतर्क, सीलिएक रोग बन सकता है बड़ी वजह
बच्चों में लंबे समय तक दस्त की समस्या को अक्सर सामान्य पेट की गड़बड़ी मानकर टाल दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह लापरवाही गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार दस्त (क्रॉनिक डायरिया) सीलिएक रोग का प्रमुख संकेत हो सकता है, जिसका समय रहते इलाज न किया जाए तो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ता है। इसी बढ़ती चिंता को देखते हुए दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में सीलिएक बीमारी को लेकर एक जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं मानव पोषण विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गोविंद के. मखारिया ने बताया कि सीलिएक रोग केवल पाचन तंत्र तक सीमित नहीं रहता। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों में दस्त के साथ-साथ कमजोरी, एनीमिया, हड्डियों में दर्द और बार-बार फ्रैक्चर जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं। कई मामलों में टाइप-1 डायबिटीज और थायराइड जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह रोग बच्चों के साथ-साथ वयस्कों को भी प्रभावित कर सकता है।
उत्तर भारत में ज्यादा मामले
डॉ. मखारिया ने बताया कि भारत में सीलिएक रोग के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर भारत में इसके मरीजों की संख्या दक्षिण भारत की तुलना में अधिक पाई जाती है। इसका एक बड़ा कारण यहां गेहूं आधारित भोजन का अधिक सेवन माना जा रहा है। चूंकि सीलिएक रोग ग्लूटिन से जुड़ा होता है, इसलिए ग्लूटिन युक्त आहार इसके लक्षणों को और गंभीर बना देता है।
क्या है सीलिएक बीमारी
सीलिएक रोग एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो ग्लूटिन नामक प्रोटीन के सेवन से होती है। ग्लूटिन मुख्य रूप से गेहूं, जौ और राई में पाया जाता है। जब इस बीमारी से ग्रस्त बच्चा ग्लूटिन युक्त भोजन करता है, तो उसकी छोटी आंत में सूजन आ जाती है। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते और बच्चा धीरे-धीरे कुपोषण की ओर बढ़ने लगता है।
इस रोग से पीड़ित बच्चों में वजन न बढ़ना, उम्र के अनुसार लंबाई न बढ़ पाना, पेट फूलना, उलझन और थकान जैसे लक्षण भी आम हैं। कई बार ये संकेत धीरे-धीरे सामने आते हैं, जिससे माता-पिता को बीमारी का अंदाजा नहीं लग पाता।
आरएमएल अस्पताल में विशेषज्ञों की चेतावनी
आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विवेक दीवान ने कहा कि सीलिएक बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती इसकी समय पर पहचान है। अगर शुरुआती चरण में इसका पता चल जाए, तो केवल खानपान में बदलाव करके बच्चे को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में लगातार दिखने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. दिनेश कुमार ने जानकारी दी कि आरएमएल अस्पताल में सीलिएक रोग से जुड़े मामलों के लिए विशेष गैस्ट्रोएंटरोलॉजी पीडियाट्रिक क्लीनिक चलाया जा रहा है। इस क्लीनिक में हर सप्ताह तीन से चार नए बच्चे जांच के लिए पहुंच रहे हैं, जो इस बीमारी के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करता है।
क्लीनिक की सुविधा
क्लीनिक प्रभारी डॉ. वी.के. मिश्रा ने बताया कि यह क्लीनिक सप्ताह में दो दिन—सोमवार और बृहस्पतिवार—को दोपहर दो बजे संचालित होता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे में लंबे समय से दस्त, कमजोरी, वजन या लंबाई न बढ़ने जैसे लक्षण दिखें, तो माता-पिता को तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
सही समय पर इलाज से संभव है स्वस्थ भविष्य
डॉक्टरों के अनुसार, सीलिएक रोग का इलाज दवाओं से नहीं, बल्कि पूरी तरह ग्लूटिन-फ्री डाइट अपनाने से संभव है। सही आहार और नियमित चिकित्सकीय निगरानी से बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। ऐसे में जागरूकता और समय पर कदम उठाना ही इस बीमारी से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।



