
Budget 2026 के झटके से फिसले सोने-चांदी के दाम, निवेशकों में बेचैनी—खरीदारों के लिए मौका
केंद्रीय बजट 2026-27 के एलानों का असर सर्राफा बाजार पर तुरंत दिखा। बजट डे पर सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे जहां निवेशक सतर्क हो गए, वहीं फिजिकल मार्केट के खरीदारों में नई उम्मीद जगी। वायदा कारोबार में सोना करीब ₹8,097 गिरकर ₹1,41,556 पर पहुंच गया, जबकि चांदी ₹26,273 टूटकर ₹2,65,652 पर आ गई।

बजट डे पर क्यों टूटी कीमती धातुएं?
बाजार जानकारों के मुताबिक, बजट से पहले ही सोने-चांदी में तेज तेजी आ चुकी थी। ऐसे में मुनाफावसूली, बजट से जुड़ी अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों ने मिलकर कीमतों पर दबाव बनाया। चूंकि इस बार बजट रविवार को पेश हुआ, इसलिए कमोडिटी बाजार खुले रहे और निवेशकों की प्रतिक्रिया तुरंत दिखी।
चांदी की चाल ने बढ़ाई हलचल
बीते सप्ताह गुरुवार को चांदी ने नया इतिहास बनाया था। 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी ₹4,20,048 प्रति किलो के लाइफटाइम हाई तक पहुंची। लेकिन इसके अगले ही दिन जोरदार बिकवाली देखने को मिली और भाव ₹1.28 लाख टूटकर ₹2,91,922 पर आ गए।
बजट से ठीक पहले रविवार को गिरावट और तेज हो गई। चांदी करीब 9 फीसदी या ₹26,273 से ज्यादा सस्ती होकर ₹2,65,652 प्रति किलो पर आ गई। इतनी बड़ी टूट ने बाजार में हलचल बढ़ा दी।
सोने की चमक भी पड़ी फीकी
सोने का रुख भी कमजोर रहा। एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) गुरुवार को ₹1,93,096 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद मुनाफावसूली शुरू हुई और एक ही दिन में सोना ₹42,247 टूटकर ₹1,50,849 पर आ गया।
बजट डे पर बिकवाली और बढ़ी, जिससे सोना 8.8 फीसदी से ज्यादा फिसलकर करीब ₹13,711 की गिरावट के साथ ₹1,38,634 प्रति 10 ग्राम तक आ गया।
पहले से क्यों था दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले सप्ताह की तेज गिरावट ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया था। बाजार में पहले से ही यह आशंका थी कि बजट डे पर सोने-चांदी में और दबाव देखने को मिल सकता है। जैसे ही वायदा कारोबार शुरू हुआ, यह अनुमान सच साबित होता दिखा।
आगे का रुख क्या होगा?
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतें अस्थिर रह सकती हैं। वैश्विक संकेत, डॉलर की चाल और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा तय करेंगी। हालांकि, मौजूदा स्तर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चरणबद्ध खरीदारी का मौका भी बन सकते हैं।
निष्कर्ष
बजट के झटके से सर्राफा बाजार में तेज गिरावट जरूर आई है, लेकिन हर गिरावट के साथ नए अवसर भी जन्म लेते हैं। अब निवेशकों की नजरें वैश्विक संकेतों और घरेलू मांग पर टिकी रहेंगी, जो आगे की चाल तय करेंगी।
