
मनीषा मौत केस: कब आएगा सच सामने? CM नायब से मिलने की तैयारी में 11 सदस्यीय कमेटी, जानिए अब तक की पूरी कहानी
शिक्षिका मनीषा की रहस्यमयी मौत को लेकर एक बार फिर गांव ढाणी लक्ष्मण में आक्रोश देखने को मिला। शनिवार को गांव के मैन चौक पर हुई अहम बैठक में जांच में हो रही देरी पर सवाल उठाए गए और सीबीआई जांच की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई गई। बैठक के बाद ग्रामीणों ने बड़ा फैसला लेते हुए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जो जल्द ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर मामले के खुलासे की मांग करेगी।

यह बैठक गांव के पूर्व सरपंच शिंभूराम की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। बैठक में यह साफ तौर पर कहा गया कि मनीषा मौत मामले में अब तक सच्चाई सामने नहीं आ पाई है और परिजनों व ग्रामीणों को केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक दोषियों को बेनकाब नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
11 सदस्यीय कमेटी का गठन, CM से मिलेगी टीम
बैठक में ग्रामीणों के सुझावों के बाद गांव ढाणी लक्ष्मण की 11 सदस्यीय कमेटी बनाई गई। इस कमेटी में वर्तमान और पूर्व सरपंचों के साथ-साथ गांव के वरिष्ठ और सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों को शामिल किया गया है। इसके अलावा आसपास के आठ गांवों से भी दो-दो प्रतिनिधियों को जोड़ा गया है, ताकि यह लड़ाई केवल एक गांव तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे क्षेत्र की आवाज बन सके।
गठित कमेटी में जयसिंह सरपंच, पूर्व सरपंच शिंभूराम, विजेंद्र जांगड़ा, रणवीर स्वामी, पूर्व सरपंच महावीर, अनंतराम (पूर्व सरपंच), सतवीर शर्मा, कुलदीप स्वामी, सुरेश ईश्वर, संजय स्वामी और रामकिशन शामिल हैं। कमेटी का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर सीबीआई जांच की स्थिति, अब तक की प्रगति और देरी के कारणों पर जवाब मांगेंगे।
ग्रामीणों में बढ़ता रोष
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि मनीषा की मौत को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है। सीबीआई की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान या खुलासा न होने से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआत से ही इस मामले में लापरवाही बरती गई और अगर समय रहते सख्त कार्रवाई होती, तो सच्चाई अब तक सामने आ चुकी होती।
ग्रामीणों ने यह भी दोहराया कि मनीषा आत्महत्या नहीं कर सकती थी और मामले के कई पहलू अभी भी अनसुलझे हैं। इसी वजह से वे सरकार और जांच एजेंसियों पर दबाव बनाना चाहते हैं।
अब तक क्या-क्या हुआ: पूरी टाइमलाइन
11 अगस्त 2025
शिक्षिका मनीषा रोज की तरह सुबह बच्चों को पढ़ाने के लिए घर से निकलीं, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटीं। परिजनों ने पहले खुद तलाश की और फिर डायल 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी।
12 अगस्त 2025
पूरे दिन खोजबीन के बावजूद मनीषा का कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने पुलिस पर गंभीरता से काम न करने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर तलाश तेज की।
13 अगस्त 2025
सिंघानी गांव के खेतों में मनीषा का शव मिला, जिसकी गर्दन कटी हुई थी। परिजनों ने शव की पहचान की। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और सड़क जाम कर करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों की मांग थी कि पहले मामले का खुलासा किया जाए, तभी शव उठाया जाए।
14 अगस्त 2025
परिजनों ने सिविल अस्पताल में धरना शुरू कर दिया और शव लेने से इनकार कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच के लिए छह टीमों का गठन किया।
15 अगस्त 2025
परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की।
16 अगस्त 2025
मुख्यमंत्री के निर्देश पर भिवानी के एसपी को हटाया गया और लोहारू थाने के कई पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। ढिगावा मंडी में परिजनों का धरना जारी रहा। दिल्ली रोड जाम हुआ और बाजार भी बंद रहा। इसी दिन रोहतक पीजीआई में दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया।
17 अगस्त 2025
ढिगावा मंडी में धरना जारी रहा। मौके पर पहुंचीं मंत्री श्रुति चौधरी ने परिजनों को आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन और कमेटी के बीच लंबी बातचीत हुई, लेकिन परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हुए।
18 अगस्त 2025
धरना जारी रहा और कुछ समय के लिए दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709E को जाम किया गया। इसी दिन सोशल मीडिया पर एक कथित सुसाइड नोट वायरल हुआ, जिसने मामले को और उलझा दिया। शाम को फिर जाम लगा, जिसे बाद में खुलवा दिया गया।
18 अगस्त 2025 (शाम)
प्रशासन और परिवार के बीच बैठक हुई। परिजन जांच से संतुष्ट होने की बात कहते हुए अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए।
19 अगस्त 2025
मनीषा के पिता ने वीडियो जारी कर कहा कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती और उन पर दबाव बनाकर सहमति ली गई थी। इसके बाद अंतिम संस्कार नहीं हुआ।
20 अगस्त 2025
सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया। दिल्ली एम्स में तीसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया। मांगें माने जाने के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए और धरना समाप्त किया।
21 अगस्त 2025
ढाणी लक्ष्मण गांव में मनीषा का अंतिम संस्कार किया गया।
26 अगस्त 2025
मामला औपचारिक रूप से सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया।
03 सितंबर 2025
सीबीआई की टीम जांच के लिए भिवानी पहुंची और केस से जुड़े दस्तावेजों व सबूतों की जांच शुरू की।

