
नाबालिग छात्रा का पीछा बना भारी, आरोपी युवक जेल पहुंचा
मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र से एक बार फिर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। कक्षा सात में पढ़ने वाली 14 वर्षीय छात्रा का लगातार पीछा कर उसे परेशान कर रहे एक युवक को आखिरकार परिजनों और पुलिस की सतर्कता के चलते जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया। आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

मेडिकल थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहने वाली यह किशोरी रोज की तरह स्कूल जाती थी। परिजनों के अनुसार, बीते चार दिनों से एक युवक उसके पीछे-पीछे घूम रहा था और रास्ते में उसे असहज महसूस कराता था। आरोपी युवक की पहचान गौरव तोमर, निवासी जठोली के रूप में हुई है। शुरुआत में छात्रा ने डर और झिझक के कारण यह बात किसी को नहीं बताई, लेकिन लगातार उत्पीड़न के चलते वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी।
कुछ दिनों बाद छात्रा ने हिम्मत जुटाकर अपने परिजनों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। बेटी की बात सुनकर परिवार चिंतित हो गया और उन्होंने तुरंत हालात को गंभीरता से लिया। परिजनों ने फैसला किया कि वे खुद स्थिति पर नजर रखेंगे ताकि आरोपी की हरकतों को सबूत के साथ पकड़ सकें।
शुक्रवार को जब छात्रा स्कूल के लिए निकली, तो उसके परिजन कुछ दूरी बनाकर पीछे चलने लगे। रास्ते में जैसे ही आरोपी युवक ने फिर से छात्रा का पीछा करना शुरू किया, परिजनों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। अचानक पकड़े जाने से आरोपी घबरा गया, लेकिन गुस्साए परिजनों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही मेडिकल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को शांत कराया और आरोपी युवक को हिरासत में लेकर थाने ले गई। इसके बाद छात्रा के परिजनों की ओर से लिखित तहरीर दी गई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए मामले को गंभीरता से लेते हुए पॉक्सो एक्ट लगाया गया है। आरोपी को मेडिकल परीक्षण और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। नाबालिगों और महिलाओं की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति बच्चों या किशोरियों को परेशान करता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूल जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस को नियमित गश्त बढ़ानी चाहिए। कई अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूलों के आसपास संदिग्ध लोगों पर विशेष नजर रखी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
छात्रा के परिजनों ने कहा कि समय रहते बेटी ने उन्हें पूरी बात बता दी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों से नियमित बातचीत करें और यदि बच्चे किसी तरह की परेशानी या डर की बात करें तो उसे नजरअंदाज न करें।
पुलिस अब आरोपी के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गौरव तोमर पहले भी किसी तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं। यदि उसके खिलाफ पहले से कोई मामला दर्ज पाया गया, तो उसे भी केस डायरी में शामिल किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि समाज में नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता कितनी जरूरी है। हालांकि इस घटना में परिजनों की सजगता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आरोपी को सजा की प्रक्रिया तक पहुंचा दिया गया, लेकिन ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए समाज, परिवार और प्रशासन को मिलकर लगातार प्रयास करने होंगे।



