
श्मशान घाट में अंधविश्वास की वारदात: अस्थियां चुराते पकड़ी गईं दो महिलाएं, गांव में बवाल; तांत्रिक की भूमिका संदिग्ध
उत्तर प्रदेश के शामली जिले से अंधविश्वास और तांत्रिक गतिविधियों से जुड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। गांव झाड़खेड़ी के श्मशान घाट से मानव अस्थियां चोरी किए जाने की घटना ने पूरे गांव में हड़कंप मचा दिया। ग्रामीणों के विरोध और हंगामे के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है। उनकी निशानदेही पर चोरी की गई मानव अस्थियां भी बरामद कर ली गई हैं, जबकि मामले के सूत्रधार बताए जा रहे एक तांत्रिक की तलाश जारी है।

जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को गांव निवासी गोपाल के पिता मिट्ठन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। परिजनों ने गांव के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया। अगले दिन शुक्रवार सुबह कुछ ग्रामीण श्मशान घाट पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दो महिलाएं चिता की राख से अस्थियां निकाल रही हैं। यह दृश्य देखते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और मौके पर शोर-शराबा शुरू हो गया।
घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने गांव झाड़खेड़ी निवासी महिला कुलसुम को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान उसके घर से चोरी की गई मानव अस्थियां बरामद की गईं। इसके बाद पुलिस ने दूसरी आरोपी महिला मुन्नी, निवासी रहमतनगर कैराना, को भी गिरफ्तार कर लिया।
कोतवाली पुलिस के अनुसार, मृतक के पुत्र गोपाल की शिकायत पर दोनों महिलाओं के खिलाफ श्मशान घाट से मानव अस्थियां चोरी करने का मामला दर्ज किया गया है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी महिलाएं मानव अस्थियों का उपयोग शरीर में गांठ जैसी गंभीर बीमारियों के तथाकथित इलाज के लिए करती थीं। उनका दावा था कि अस्थियों को मरीज के सीने पर रखने से बीमारी ठीक हो सकती है। हालांकि पुलिस के अनुसार अब तक किसी भी मरीज के स्वस्थ होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। महिलाओं ने यह भी स्वीकार किया कि वे यह सब एक तांत्रिक के कहने पर कर रही थीं।
इस खुलासे के बाद पुलिस ने तांत्रिक की भूमिका को गंभीरता से लेते हुए उसकी तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तांत्रिक की गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस तरह के अंधविश्वास के पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो नहीं काम कर रहा।
पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें और किसी भी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टरों की सलाह लें। यह घटना समाज में फैले अंधविश्वास की एक डरावनी तस्वीर पेश करती है, जिस पर सख्त कार्रवाई जरूरी बताई जा रही है।



