
कमांडो काजल की हत्या: डर, राज और उत्पीड़न की साजिश में बुझ गई एक जांबाज़ की जिंदगी
दिल्ली पुलिस की कमांडो काजल की हत्या का मामला अब सिर्फ एक घरेलू हिंसा का केस नहीं रह गया है, बल्कि इसमें डर, छुपे राज, आर्थिक शोषण और लंबे समय से चले आ रहे मानसिक उत्पीड़न की कई परतें सामने आ रही हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मृतका के मायके पक्ष के खुलासे इस हत्याकांड को और भी भयावह बना रहे हैं।

काजल के भाई निखिल और मां मीना का कहना है कि आरोपी पति अंकुर ने किसी गुस्से में नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत काजल की हत्या की। इसकी सबसे बड़ी वजह वह डर था, जो अंकुर को अपनी पत्नी से लगने लगा था। काजल उसके अतीत से जुड़े ऐसे राज जानती थी, जिनके उजागर होने से उसकी पूरी दुनिया बिखर सकती थी।
आरोपी के अतीत से जुड़ा था पेपर लीक का साया
परिवार के मुताबिक, अंकुर का नाम उत्तर प्रदेश के एक बड़े पेपर लीक मामले से जुड़ चुका था। इसके अलावा उस पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने और एक संदिग्ध मौत से जुड़े होने के आरोप भी थे। काजल को इन सभी बातों की जानकारी थी। यही वजह थी कि अंकुर हमेशा तनाव में रहता था और उसे यह डर सताता था कि अगर काजल ने कभी यह राज किसी के सामने रख दिए तो वह जेल की सलाखों के पीछे पहुंच सकता है।

निखिल का दावा है कि काजल कभी-कभी हल्के मजाक में यह बात कह देती थी कि “तुम तो मेरठ वाले मामले से बच गए, लेकिन अगर सच बाहर आ गया तो मुश्किल हो जाएगी।” हालांकि काजल का मकसद डराना नहीं था, लेकिन अंकुर के मन में यह बात जहर की तरह घर कर गई।
छह महीने पहले भी हुई थी हिंसा
मायके पक्ष का कहना है कि यह पहली बार नहीं था जब अंकुर ने काजल पर हाथ उठाया। करीब छह महीने पहले भी उसने मारपीट की थी। उस वक्त मामला बढ़ने से पहले ही दबा दिया गया। निखिल के अनुसार, उस घटना के बाद अंकुर ने काजल के पैर पकड़कर माफी मांगी थी और खुद को बदलने का वादा किया था। काजल ने शादी और रिश्ते को बचाने के लिए उसे एक और मौका दिया, लेकिन यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

डंबल से हमला कर की गई निर्मम हत्या
22 जनवरी की रात यह विवाद एक खौफनाक अंजाम तक पहुंच गया। हरियाणा के गन्नौर निवासी अंकुर ने गुस्से और डर में आकर काजल के सिर पर डंबल से ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही काजल की मौत हो गई। काजल मूल रूप से गांव बड़ी की रहने वाली थी और दिल्ली पुलिस में कमांडो के पद पर तैनात थी। वह अपने साहस और अनुशासन के लिए जानी जाती थी।
खुशियों के बीच आई मौत की खबर
निखिल, जो खुद दिल्ली पुलिस में सिपाही है, ने बताया कि हाल ही में उसकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया था। इसी खुशी में काजल कुछ दिन के लिए मायके आई थी। घर में जश्न का माहौल था। 21 जनवरी को काजल ने यह कहकर दिल्ली लौटने की बात कही कि 26 जनवरी की ड्यूटी के कारण उसे समय पर पहुंचना है। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी और अगले दिन घर में मातम छा जाएगा।

आखिरी रात भाई से साझा किया था दर्द
हत्या से कुछ घंटे पहले काजल ने अपने भाई निखिल से फोन पर बात की थी। वह बेहद परेशान और भावुक थी। उसने बताया था कि पति के साथ उसका झगड़ा हुआ है और वह मानसिक दबाव में है। बातचीत के दौरान काजल ने अपने जीवन की कई परेशानियों का जिक्र किया।
उसने बताया कि शादी से पहले उसने 10 लाख रुपये का लोन लिया था, जिसमें से 5 लाख रुपये उसने अंकुर को दे दिए थे। इसके अलावा देवर की शादी में करीब 15 लाख रुपये की ज्वैलरी, कार की किस्त और घर के अन्य खर्च भी वही उठा रही थी। इसके बावजूद उसे ससुराल में सम्मान नहीं मिल रहा था।
प्रेम विवाह बना तानों की वजह
काजल की मां मीना का आरोप है कि प्रेम विवाह होने के कारण ससुराल पक्ष उसे कभी स्वीकार नहीं कर पाया। रंग-रूप को लेकर उसे ताने मारे जाते थे। ससुर ओमप्रकाश और ननद पर भी मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिवार का कहना है कि काजल को बार-बार धमकी दी जाती थी कि अगर वह ज्यादा सवाल करेगी तो अंकुर की दूसरी शादी करा दी जाएगी।
मीना ने यह भी बताया कि अंकुर और उसका एक दोस्त रुड़की में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक सेंटर चलाते थे। इस सेंटर का नाम पेपर लीक और एक व्यक्ति की मौत से भी जोड़ा गया था। इन मामलों के कारण अंकुर हमेशा आशंकित रहता था।
राज खुलने का डर बना हत्या की जड़
काजल के परिवार का मानना है कि इस हत्या की असली वजह घरेलू विवाद नहीं, बल्कि राजफाश का डर था। अंकुर को लगने लगा था कि काजल अब चुप नहीं रहेगी और उसके अतीत की सच्चाई सामने ला देगी। इसी डर ने उसे हिंसक बना दिया और उसने एक जांबाज़ पुलिसकर्मी की जान ले ली।
परिवार की न्याय की गुहार
काजल के परिजन मांग कर रहे हैं कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए और अंकुर के पुराने आपराधिक मामलों को भी जोड़ा जाए। उनका कहना है कि काजल सिर्फ एक पत्नी नहीं, बल्कि देश की सेवा करने वाली एक बहादुर कमांडो थी। अगर आज उसे न्याय नहीं मिला, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल होगा।
परिवार की आंखें अब न्याय की राह पर टिकी हैं, ताकि काजल की कुर्बानी यूं ही बेकार न जाए और दोषियों को उनके किए की सजा मिल सके।



