
मामूली ऑपरेशन में बुझ गई मासूम की सांसें, पिता इलाज कराने गया था, शव लेकर लौटा
नाक की एक सामान्य बीमारी का इलाज कराने गया नौ वर्षीय बच्चा अपने पिता के साथ वापस नहीं लौट सका। मामूली बताई गई सर्जरी उसके लिए मौत का कारण बन गई। मामला महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का है, जहां नाक में बढ़े मांस (नेजल पॉलिप्स) की सर्जरी के बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी जान चली गई। यह दर्दनाक घटना करीब 19 दिन पहले हुई, लेकिन अब जाकर प्रशासन के संज्ञान में आई है। कॉलेज प्रबंधन ने ईएनटी विभाग से इलाज और जांच से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है और डेथ ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है।

झांसी जिले के चिरगांव स्थित तुलसी आश्रम इलाके में रहने वाले जितेंद्र एक छोटी दुकान पर काम करते हैं। उनका बड़ा बेटा कृष्णा कुमार, उम्र करीब नौ साल, काफी समय से नाक की समस्या से परेशान था। नाक में मांस बढ़ जाने के कारण उसे एक नथुने से सांस लेने में दिक्कत होती थी। स्थानीय स्तर पर इलाज से राहत नहीं मिलने पर जितेंद्र बेटे को 25 दिसंबर को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। पिता को उम्मीद थी कि बड़े अस्पताल में इलाज के बाद उसका बच्चा ठीक हो जाएगा।
जितेंद्र के अनुसार, ईएनटी ओपीडी में डॉक्टर तौसीफ अंसारी ने कृष्णा को देखा और कुछ दवाएं लिखकर सात दिन बाद दोबारा आने को कहा। एक जनवरी को जब वह फिर बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने डॉक्टर को बताया कि दवा से कुछ आराम मिला है। इसके बावजूद डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। पिता ने बच्चे की उम्र का हवाला देते हुए ऑपरेशन कराने में असमर्थता जताई। इसके बाद तीन जनवरी को दोबारा बुलाया गया।
तीन जनवरी को अस्पताल पहुंचते ही बिना ज्यादा बातचीत के बच्चे को ऑपरेशन के लिए भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उसकी फाइल बनवाई गई और जरूरी जांचें कराई गईं। सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बाद पांच जनवरी की सुबह कृष्णा को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। परिजनों को बताया गया कि यह एक साधारण सर्जरी है और ज्यादा खतरे की कोई बात नहीं है।
ऑपरेशन शुरू होने के करीब 40 मिनट बाद हालात अचानक बदल गए। जितेंद्र का कहना है कि एक महिला डॉक्टर घबराई हुई हालत में दौड़ते हुए ऑपरेशन थिएटर में दाखिल हुई। इसके कुछ ही देर बाद ऑपरेशन थिएटर में दवाएं उपलब्ध कराने के नाम पर 2500 रुपये लेने वाले एक कर्मचारी ने 1000 रुपये वापस कर दिए। इससे पिता को कुछ अनहोनी होने का अंदेशा होने लगा।
कुछ समय बाद कृष्णा को स्ट्रेचर पर लाकर इमरजेंसी आईसीयू में पहुंचाया गया। जब पिता ने अपने बेटे को देखा तो उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी और शरीर ठंडा पड़ चुका था। करीब दो घंटे तक इमरजेंसी में रखने के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को एक वाहन से घर भेज दिया गया।
पिता का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसके बेटे की जान गई। उनका कहना है कि अगर ऑपरेशन में इतना जोखिम था तो पहले साफ तौर पर क्यों नहीं बताया गया। साथ ही, ऑपरेशन के दौरान बिगड़ी हालत को संभालने में भी गंभीर चूक हुई। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई और किसी अधिकारी ने उनसे ठीक से बात तक नहीं की।
वहीं, ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कश्यप का कहना है कि उन्हें ऑपरेशन के दौरान बच्चे की मौत की जानकारी नहीं है। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर तौसीफ अंसारी का दावा है कि सर्जरी के दौरान बच्चे को हार्ट फेल हुआ, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि ईएनटी विभाग से बच्चे के इलाज और जांच की पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और डेथ ऑडिट भी कराया जाएगा। अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस बेटे को पिता इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल लाया था, वही बेटा अब कफन में लिपटकर घर लौटा। पीड़ित परिवार अब सिर्फ न्याय की मांग कर रहा है।



