
चांदी ने तोड़ा टाइम रिकॉर्ड: 24 घंटे में ₹10 हजार की छलांग, 14 महीने का सफर 30 दिन में पूरा; सोना भी ₹1.5 लाख के करीब
सर्राफा बाजार में इस वक्त जो हो रहा है, उसने निवेशकों से लेकर जानकारों तक सभी को चौंका दिया है। खासकर चांदी की रफ्तार ऐसी हो गई है, जिसे बाजार की भाषा में भी “अभूतपूर्व” कहा जा रहा है। जिस चांदी को एक लाख से दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने में 14 महीने लगे थे, उसने दो लाख से तीन लाख रुपये का आंकड़ा महज 30 दिनों में पार कर लिया। बीते एक ही दिन में चांदी करीब ₹10 हजार तक उछल गई।

मंगलवार को एमसीएक्स पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3.2 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी के साथ ₹3,19,949 प्रति किलोग्राम के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई। हाजिर बाजार में भी चांदी के भाव ₹3.20 से ₹3.23 लाख प्रति किलो के आसपास कारोबार करते नजर आए। यह तेजी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि बाजार की सोच को बदल देने वाली मानी जा रही है।
सोना भी रिकॉर्ड जोन में चांदी के साथ-साथ सोने ने भी नया इतिहास रच दिया है। एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना ₹2,560 की उछाल के साथ ₹1,48,199 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। दिल्ली सर्राफा बाजार में पहली बार सोने ने ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा छू लिया। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि सुरक्षित निवेश की मांग अपने चरम पर है।
ग्लोबल मार्केट से मिल रही आग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। कॉमेक्स पर सोना पहली बार $4,700 प्रति औंस के पार निकलकर $4,722.55 के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया, जबकि चांदी $94.74 प्रति औंस के ऑल टाइम हाई पर कारोबार करती दिखी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तेजी सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि पूरी तरह ग्लोबल फैक्टर से संचालित है।
आंकड़े जो डराते भी हैं अगर चांदी की चाल को ठंडे दिमाग से देखें, तो तस्वीर और भी हैरान करती है। अक्टूबर 2024 में चांदी करीब ₹1 लाख प्रति किलो थी। दिसंबर 2025 तक यह ₹2 लाख तक पहुंची—यानी 14 महीने का सफर। लेकिन इसके बाद दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच महज एक महीने में ही चांदी ₹2 लाख से सीधे ₹3 लाख के पार निकल गई। पिछले दो कारोबारी सत्रों में ही कीमतों में ₹32,000 से ज्यादा यानी 11 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है।
तेजी की असली वजह क्या? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस विस्फोटक तेजी के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, वेनेजुएला और NATO से जुड़ी अनिश्चितताएं निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स से दूर कर रही हैं। ऐसे माहौल में सोना और चांदी फिर से “सेफ हेवन” बनकर उभरे हैं।
इसके अलावा चांदी की औद्योगिक मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की खपत तेजी से बढ़ रही है, जबकि वैश्विक सप्लाई सीमित बनी हुई है। यही सप्लाई-डिमांड गैप चांदी को रॉकेट की तरह ऊपर ले जा रहा है।
क्या अब भी खरीदारी सही है? तेजी जितनी तेज है, उतनी ही चेतावनियां भी तेज हो रही हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इतनी तेज रैली के बाद मुनाफावसूली आना तय है। अनुमान है कि चांदी के भाव अस्थायी रूप से ₹2.60 लाख प्रति किलो तक फिसल सकते हैं। हालांकि लंबी अवधि में ट्रेंड अभी भी मजबूत माना जा रहा है।
अब बाजार की नजरें 1 फरवरी को आने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं। निवेशक खासतौर पर यह देखना चाहते हैं कि सरकार सोने-चांदी के आयात शुल्क को लेकर क्या संकेत देती है, क्योंकि वहीं से आगे की दिशा तय होगी।
